अमृतपाल सिंह की नजरबंदी पर फैसला सुरक्षित; सरकार ने 15 लोगों की सूची और विदेशी आतंकी संपर्क का दिया हवाला
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सांसद अमृतपाल सिंह की नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा। सरकार ने 15 लोगों की ...और पढ़ें

सांसद अमृतपाल सिंह।
HighLights
हाई कोर्ट ने अमृतपाल की नजरबंदी पर फैसला सुरक्षित रखा।
सरकार ने आतंकी अर्शदीप डल्ला से संबंध का आरोप लगाया।
15 व्यक्तियों की 'हिट लिस्ट' भी सरकार ने पेश की।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की नजरबंदी ( एनएसए) को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पर आधारित बेंच ने यह फैसला सुरक्षित रखा।
सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने अदालत को बताया कि अमृतपाल सिंह के कथित तौर पर कनाडा स्थित आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला और अन्य गैंगस्टरों से संबंध तथा 15 व्यक्तियों की कथित ‘हिट लिस्ट’ इस मामले के दो मुख्य आधार हैं।
सरकार ने कहा कि नजरबंदी के दस्तावेजों में शुरुआती चार अनुच्छेद विशेष रूप से कथित हिट लिस्ट से जुड़े तथ्यों का उल्लेख करते हैं । सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि सूची में शामिल कई व्यक्ति पहले ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन से जुड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने अमृतपाल सिंह की आलोचना शुरू कर दी थी।
इनमें से कुछ लोगों के साथ वैचारिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए थे और इसी पृष्ठभूमि में उनके खिलाफ खतरे की आशंका जताई गई। सरकार ने यह भी उल्लेख किया कि सूची में शामिल एक व्यक्ति की बाद में हत्या हो चुकी है, जिससे संभावित खतरे की गंभीरता और बढ़ जाती है।
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2024 में दर्ज की एफआईआर का हवाला
सरकार ने अपनी दलीलों में वर्ष 2024 में दर्ज की एफआईआर का हवाला देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आए बयानों से यह संकेत मिलता है कि अमृतपाल सिंह कथित रूप से प्रतिबंधित और घोषित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों के संपर्क में थे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनवरी 2023 में जारी अधिसूचना का उल्लेख करते हुए बताया गया कि अर्श डल्ला को गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम के तहत व्यक्तिगत आतंकी घोषित किया जा चुका है और वह लक्षित हत्याओं, जबरन वसूली तथा हथियारों की तस्करी जैसे मामलों में आरोपित रहा है।
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नजरबंदी हटाने से सार्वजनिक शांति
सरकार ने यह भी कहा कि जांच के दौरान दर्ज कुछ गवाहों के बयानों ने नजरबंदी आदेश को प्रभावित किया है और इन बयानों की सामग्री को याचिका में ठोस रूप से चुनौती नहीं दी गई है। अदालत में सरकार ने तर्क दिया कि उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि नजरबंदी हटाने से सार्वजनिक शांति और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वही अमृतपाल ने नजरबंदी के आदेश को अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की।