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पंचकूला में जन्मीं और चंडीगढ़ में पढ़ी आशिता बनीं लेफ्टिनेंट, विज्ञान और तकनीकी का क्षेत्र छोड़ पहनी सेना की वर्दी

Published: Sun, 06 Sep 2026 05:47 PM (IST)

इंजीनियरिंग छोड़ देश सेवा का मार्ग चुनने वाली आशिता स्वामी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी हैं। पंचकूला में जन्मीं और ...और पढ़ें

पासिंग आउट परेड के बाद परिजनों के साथ आशिता स्वामी।

पासिंग आउट परेड के बाद परिजनों के साथ आशिता स्वामी।

HighLights

  1. आशिता स्वामी इंजीनियरिंग छोड़ भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनीं।

  2. पंचकूला में जन्मीं, चंडीगढ़ में पढ़ीं, ओटीए गया से कमीशन।

  3. मुश्किल प्रशिक्षण के बावजूद बनीं बटालियन अंडर ऑफिसर।

डाॅ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंचकूला में जन्मीं और चंडीगढ़ में पढ़ी आशिता स्वामी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ जैतूनी वर्दी पहनने का गौरव हासिल किया है। 

पांच सितंबर को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), गया में हुई पासिंग आउट परेड में उन्हें भारतीय सेना में कमीशन प्रदान किया गया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने के बाद सेना में जाने का उनका फैसला युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।

पंचकूला के मनसादेवी कॉम्प्लेक्स की रहने वाली आशिता स्वामी चंडीगढ़ के कार्मेल काॅन्वेंट स्कूल में पढ़ी। इसके बाद राजस्थान के बनस्थली विद्यापीठ से मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने चंडीगढ़ स्थित सीएसआईआर-सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईआर-सीएसआईओ) में प्रोजेक्ट एसोसिएट के तौर पर करीब डेढ़ वर्ष तक काम किया। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अच्छा करियर होने के बावजूद उनके मन में देशसेवा की इच्छा लगातार मजबूत होती रही।

इसी जुनून के चलते आशिता ने नौकरी छोड़कर भारतीय सेना में जाने का निर्णय लिया। उन्होंने सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) की परीक्षा दी और सर्विस सेलेक्शन सेंटर नॉर्थ से अनुशंसित हुईं। इसके बाद 27 मार्च 2025 को उन्होंने ओटीए गया में सैन्य प्रशिक्षण शुरू किया।
मुश्किल दौर में भी नहीं टूटा हौसला । सैन्य प्रशिक्षण का सफर उनके लिए आसान नहीं रहा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जूनियर कोर्स में रिलेगेट किया गया। यह उनके लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन आशिता ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

उन्होंने दोबारा मेहनत की और पूरी दृढ़ता के साथ प्रशिक्षण जारी रखा। उनके नेतृत्व कौशल और क्षमता पर भरोसा जताते हुए पहले ही रोटेशन में उन्हें बटालियन अंडर ऑफिसर (बीयूओ) की प्रतिष्ठित जिम्मेदारी सौंपी गई।

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अनुशासन, नेतृत्व और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण पूरा होने तक वह ग्योरज कंपनी की कंपनी क्वार्टरमास्टर सार्जेंट (सीक्यूएमएस) की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। पांच सितंबर को कमीशन मिलने के साथ ही इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान से शुरू हुआ उनका सफर भारतीय सेना की वर्दी तक पहुंच गया।