ECHS घोटाला! ट्राईसिटी में 9 प्राइवेट हॉस्पिटल व डॉक्टरों के घरों पर CBI की रेड; शाम तक डटी टीम, रिकॉर्ड जब्त, होंगी गिरफ्तारी
सीबीआई ने ट्राईसिटी के 9 निजी अस्पतालों पर छापा मारा है, जिसमें पूर्व सैनिकों की ईसीएचएस योजना में 100 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है। फर् ...और पढ़ें

सीबीआई ने ट्राईसिटी में 9 जगह की रेड।
HighLights
प्राइवेट हॉस्पिटलों के साथ मिलकर हुआ फर्जीवाड़ा
सेक्टर 38 के एक सेंटर में हो रहा था फर्जी रिकॉर्ड तैयार।
फर्जी मरीज, बिल और टेस्ट रिपोर्ट से धोखाधड़ी।
बरींद्र सिंह रावत, चंडीगढ़। सीबीआई ने वीरवार को ट्राईसिटी में 9 प्राइवेट हॉस्पिटलों और उनके संचालकों के घर छापा मारा। यह कार्रवाई एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) में हुए 100 करोड़ से अधिक के घोटाले में की गई।
टीम में दिल्ली और चंडीगढ़ सीबीआई के 100 से सदस्य शामिल हैं। सुबह से शाम तक सीबीआई की टीम कार्रवाई में जुटी रही और रिकॉर्ड जब्त किया। जल्द ही इसमें कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
धर्म हॉस्पिटल, केयर हॉस्पिटल, एडन हॉस्पिटल, अमर हॉस्पिटल सेक्टर 38 में एक धार्मिक स्थल में चल रहे मेडिकल सेंटर में सीबीआई की दबिश से हड़कंप मच गया।
इस घोटाले में कई हॉस्पिटल, लैब और मेडिकल सेंटर की भूमिका सामने आ चुकी है। फर्जी तरीके से मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटलों में एडमिट दिखाकर इस स्कीम के तहत मोटे क्लेम लिए गए। न केवल मरीज की एडमिशन फर्जी हुई बल्कि दवा के बिल और टेस्ट रिपोर्ट भी फर्जी बनाई गई।
ईसीएचएस में फर्जीवाड़े का यह खेल सुनियोजित तरीके से खेल जा रहा है। सेक्टर 38 इस खेल का केंद्र है। इस खेल में प्राइवेट हॉस्पिटल से लेकर, डॉक्टर, प्राइवेट लैब तक शामिल है। यही नहीं शहर की एक प्राइवेट एजेंसी इस खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह एजेंसी हॉस्पिटलों को ईसीएचएस के तहत रजिस्टर्ड मरीज लाकर देती है।
महंगी दवा और फर्जी लैब रिपोर्ट
चंडीगढ़ के साथ साथ मोहाली और पंचकूला के हॉस्पिटल की इसमें प्रमुख भूमिका है। मरीज को डॉक्टरों की मिलीभगत से महंगी से महंगी दवा लिखी जाती है। यह दवा खरीदी नहीं जाती सिर्फ फर्जी बिल बनता है। मरीज को गंभीर दिखाने के लिए लैब रिपोर्ट भी फर्जी तैयार की जाती है।
मरीज के हॉस्पिटल में एडमिट हुए बिना हफ्ते दो हफ्ते का एडमिशन का बिल बना दिया जाता है। कई मामलों में तो बिना ऑपरेशन के ही मरीज को ऑपरेट हुआ बता कर बिल वसूल लिया गया। बिल की पेमेंट होने के बाद डॉक्टर, हॉस्पिटल, लैब और एजेंसी के बीच हिस्से का बंटवारा होता है।
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ऐसे होता है खेल
पहले मरीज ढूंढा जाता है। फिर बिना किसी जरूरत के मरीज को एडमिट दिखाया जाता है। उसके मेडिकल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की जाती है। फर्जी टेस्ट रिपोर्ट जोड़ी जाती हैं। फर्जी बिल बनाए जाते है। यही नहीं मरीजों की फाइल में फर्जी डॉक्यूमेंट भी लगाए जाते है। इनके आधार पर मरीज को एडमिट दिखाया जाता है। बिना एडमिट हुए सभी खर्चों के बिल बनते हैं।
एक दर्जन डॉक्टर शामिल
इस खेल में प्राइवेट हॉस्पिटलों के एक दर्जन डॉक्टर शामिल है। मरीजों को अधिकतर चंडीगढ़ और मोहाली के हॉस्पिटल में एडमिट दिखाया जाता है। मरीजों की सिर्फ ओपीडी में बुलाया जाता हैं। वहीं उन्हें हॉस्टल में एडमिट दिखा दिया जाता है।
5 से 10 लाख तक के बिल
हॉस्पिटलों ने ईसीएचएस स्कीम के तहत फर्जीवाड़े से 5 से 10 लाख रुपए तक के फर्जी बिल तैयार किए है। इनमें फर्जी टेस्ट रिपोर्ट और महंगी दवाइयों का बिल जोड़ दिया जाता है। दर्जनों बिल 2 से 5 लाख रुपए के है।