चंडीगढ़ में ASI ने 12 वाहनों को मारी थी टक्कर, पुलिस ने बरती नरमी; अथॉरिटी ने विभागीय कार्रवाई पर उठाए सवाल
पुलिस कंप्लेंट्स अथॉरिटी ने नशे में 12 वाहनों को टक्कर मारने वाले एएसआई दलजीत सिंह के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में ASI ने 12 वाहनों को मारी थी टक्कर (फोटो: जागरण)
HighLights
पुलिस कंप्लेंट्स अथॉरिटी ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया।
एएसआई दलजीत सिंह ने नशे में 12 वाहनों को टक्कर मारी।
अथॉरिटी ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ पुलिस के एएसआई दलजीत सिंह द्वारा कथित रूप से नशे की हालत में कई वाहनों को टक्कर मारने के मामले में यूटी पुलिस कंप्लेंट्स अथॉरिटी ने कड़ा रुख अपनाया है। अथॉरिटी ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए विस्तृत सुनवाई की और पुलिस अधिकारियों से जवाब तलब किया।
13 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार यह मामला शिकायत संख्या 65/2025 के रूप में दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई रिटायर्ड जस्टिस कुलदीप सिंह की अध्यक्षता वाली फुल बेंच ने की, जिसमें पूर्व आईपीएस अमरजोत सिंह गिल और रिटायर्ड आईएएस धीरा खंडेलवाल सदस्य के रूप में शामिल थे।
अखबारों की खबरों से शुरू हुई कार्रवाई
अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा कि 5 दिसंबर 2025 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में बताया गया था कि चंडीगढ़ पुलिस के सिक्योरिटी विंग में तैनात एएसआई दलजीत सिंह ने कथित रूप से शराब के नशे में कैम्बवाला रोड पर करीब एक दर्जन वाहनों को टक्कर मार दी थी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि संबंधित एएसआई पहले ड्यूटी से बिना सूचना अनुपस्थित रहे और बाद में नशे की हालत में कार्यालय पहुंचे, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके बावजूद वह अपनी कार लेकर बाहर निकले और कई वाहनों से टकरा गए।
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स्कूल बस भी चपेट में आने का दावा
अथॉरिटी ने आदेश में कहा कि समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया वीडियो में यह भी सामने आया कि हादसे में एक स्कूल बस भी प्रभावित हुई थी। वीडियो में पुलिसकर्मी एएसआई को क्षतिग्रस्त कार से बाहर निकालते दिखाई दिए, जबकि वह ठीक से चलने की स्थिति में नहीं थे।
रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना में एएसआई के माथे और आंख पर गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया था। हालांकि, किसी भी पीड़ित की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।
अथॉरिटी ने पूछा- पुलिस खुद गवाह थी तो केस क्यों नहीं दर्ज किया?
पुलिस कंप्लेंट्स अथॉरिटी ने अपने आदेश में गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब पुलिस खुद पूरी घटना की प्रत्यक्षदर्शी थी, तब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 125 और 281 के तहत मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया।
अथॉरिटी ने यह भी सवाल उठाया कि जब एएसआई को नशे की हालत में निलंबित किया गया था, तो उन्हें वाहन चलाने की अनुमति कैसे दी गई।
पुलिस की रिपोर्ट में क्या कहा गया
एसएसपी और सेक्टर-3 थाना पुलिस की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया कि 3 दिसंबर 2025 को पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 112 पर तेज रफ्तार और दुर्घटना की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो एक मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त हालत में मिली। घायल वीरेंद्र कुमार ने बयान दिया कि उसकी बाइक को एक मारुति ब्रेजा ने टक्कर मारी थी, लेकिन उसने कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया।
पुलिस ने दावा किया कि अन्य कथित पीड़ितों को भी तलाशने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई शिकायतकर्ता सामने नहीं आया। मेडिकल जांच में एएसआई दलजीत सिंह से शराब की गंध आने की पुष्टि हुई, जबकि उन्होंने रक्त नमूना देने से भी इनकार कर दिया।
इसके बाद पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत चालान किया और कलंदरा पेश किया। साथ ही 3 दिसंबर 2025 को ही एएसआई को निलंबित कर दिया गया।अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा कि घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुए थे