चंडीगढ़ में हमले के बाद चिंता बढ़ी, सीमा पार से आ रहे हथियार बड़ी चुनौती, 4 वर्षों में 2800 से ज्यादा बरामद
चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर हुए हैंड ग्रेनेड हमले में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आने से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं। सूत्रों ...और पढ़ें

सीमा पार से हथियार सप्लाई करने वालों पर कड़ी नजर। बॉर्डर पर जवान तैनात। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
चंडीगढ़ भाजपा कार्यालय पर हुए ग्रेनेड हमले में पाकिस्तान कनेक्शन।
हमले में पाकिस्तानी निर्मित जीएचडी2पी हैंड ग्रेनेड का उपयोग।
सीमा पार से आ रहे हथियार पंजाब के लिए बड़ी चुनौती।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। सेक्टर-37 स्थित पंजाब भाजपा कार्यालय के बाहर बुधवार शाम हुए हैंड ग्रेनेड में पाकिस्तान कनेक्शन जुड़ने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। सीमा पार से आ रहे हथियार चुनौती बनते जा रहे हैं। 2022 से लेकर अब तक 2800 से ज्यादा हथियार बरामद किए जा चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस चंडीगढ़ में हुए हमले में जीएचडी2पी हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है।मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने एक विशेष टीम का गठन कर दिया है।
चंडीगढ़ समेत पंजाब के कई हिस्सों में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अन्य राज्यों से जुड़े संभावित लिंक भी जांच के दायरे में लाए गए हैं। एजीटीएफ प्रमुख गुरमीत चौहान पहले ही यह चिंता जता चुके हैं कि सीमा पार से आ रहे अवैध हथियार पंजाब के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बनते जा रहे हैं।
इस हमले को पहले सामने आए कुछ मामलों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिनमें समान प्रकार के हथियारों के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या एक ही सप्लाई चेन या नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में सक्रिय है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस पूरे नेटवर्क और हमले के मास्टरमाइंड को लेकर बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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पहले भी हो चुके बड़े हमले
- 2017: लुधियाना में आरएसएस के वरिष्ठ नेता रविंदर गोसाई की घर के बाहर गोली मारकर हत्या।
- 2016: जालंधर आरएसएस से जुड़े रिटायर्ड विंग्लीडर जगदीश गगनेजा पर हमला।
- 2022: मोहाली पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर आरपीजी अटैक।
1995 के बाद किसी पार्टी ऑफिस पर हमला
1980 के दशक में पंजाब और चंडीगढ़ में राजनीतिक दफ्तरों और नेताओं पर हमले आम थे। 16 अक्टूबर 1981 में चंडीगढ़ सिविल सचिवालय के अंदर एक आईएएस अधिकारी पर हमला हुआ था। उस दौर में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई स्थानीय दफ्तरों को निशाना बनाया गया था, लेकिन 1995 के बाद से चंडीगढ़ में किसी भी पार्टी मुख्यालय पर ऐसा हमला नहीं हुआ था।