कॉन्ट्रेक्ट पर काम कर रहे 13 जेई समेत 74 कर्मचारियों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को दिए नियमित करने के आदेश
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के 74 संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आठ सप्ताह में औपचारिकताएं पूरी करने क ...और पढ़ें

74 कर्मचारियों को नियमित करने का रास्ता साफ।
HighLights
कर्मचारी 18 वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत थे।
नगर निगम को आठ सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
आदेश का पालन न करने पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम में पिछले 18 वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत 13 जूनियर इंजीनियर (जेई) समेत 74 कर्मचारियों को नियमित करने का रास्ता साफ कर दिया है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आठ सप्ताह के भीतर नियमितीकरण की सभी औपचारिकताएं पूरी करें। यदि निर्धारित समय में आदेशों का पालन नहीं किया गया तो इसे अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की डिवीजन बेंच चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा अगस्त 2025 में सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
प्रशासन ने दलील दी कि संबंधित कर्मचारी अब केंद्र सरकार के अधीन आते हैं और चूंकि केंद्र सरकार इस मामले में पक्षकार नहीं है, इसलिए उन्हें नियमित करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। हालांकि, डिवीजन बेंच ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 2007 से 2010 के बीच ग्रुप-सी पदों पर संविदा आधार पर की गई थी। अब उन्हें ग्रुप-बी से जोड़कर नियमितीकरण से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कानून और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने तर्क दिया कि लंबे समय तक निरंतर सेवा देने वाले इन कर्मचारियों के मामले में नियमितीकरण किया जाना चाहिए।
डिवीजन बेंच ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए 13 जूनियर इंजीनियरों के साथ-साथ क्लर्क, ड्राइवर और अन्य कर्मचारियों की याचिकाओं को भी इसी मामले से जोड़ दिया और सभी के पक्ष में समान आदेश पारित किए।
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मामले में शामिल जूनियर इंजीनियर वर्ष 2008 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि उन्हें समय पर नियमित कर दिया गया होता, तो आज उनमें से कई अधिकारी कार्यपालक अभियंता (एक्सईएन) के पद तक पहुंच चुके होते, लेकिन 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी वे जूनियर इंजीनियर के पद पर ही कार्य कर रहे हैं।