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    कुछ तो करो सरकार! चंडीगढ़ में आए दिन सड़कें हो रही जाम,15 अगस्त को भी डर; जानें पंजाब-हरियाणा क्यों हैं जिम्मेदार

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 04:19 PM (GMT+05:30)

    चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा के आंदोलनों का केंद्र बन गया है, जिससे शहर में लगातार जाम और जनजीवन प्रभावित हो रहा है। 15 अगस्त को भी प्रदर्शन की आशंका है, ...और पढ़ें

    पंजाब और हरियाणा के आंदोलनों के कारण चंडीगढ़ में बिगड़ती है स्थिति।

    पंजाब और हरियाणा के आंदोलनों के कारण चंडीगढ़ में बिगड़ती है स्थिति।

    HighLights

    1. चंडीगढ़ पंजाब-हरियाणा के आंदोलनों का प्रमुख केंद्र बना।

    2. प्रदर्शनों से शहर में भारी ट्रैफिक जाम की समस्या।

    3. 15 अगस्त को भी संभावित प्रदर्शन से मुश्किलें बढ़ेंगी।

    तरुण भजनी, चंडीगढ़। हे सरकार कुछ तो करो! चंडीगढ़ में आए दिन जाम में फंसे लोगों की यही पुकार होती है। वजह पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी होने के कारण चंडीगढ़ इन दिनों दोनों राज्यों के आंदोलनों का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। 15 अगस्त को भी प्रदर्शन हो सकता है।

    किसानों से लेकर कर्मचारी संगठनों, ठेका कर्मियों, आंगनबाड़ी और आशा वर्करों, बेरोजगार युवाओं तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के विरोध-प्रदर्शन का पहला पड़ाव चंडीगढ़ ही होता है। प्रदर्शन भले ही पंजाब या हरियाणा सरकार के खिलाफ हों, लेकिन सबसे अधिक परेशानी चंडीगढ़ के लोगों को उठानी पड़ती है।

    हर बड़े प्रदर्शन के दौरान पंजाब-हरियाणा सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, राजभवन और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन के कारण शहर की प्रमुख सड़कें घंटों जाम रहती हैं। इसका असर दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों और आम नागरिकों पर पड़ता है।

    वारिस पंजाब दे और किसान आंदोलन ने फिर बिगाड़ी शहर की रफ्तार

    हाल ही में शिरोमणि अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। सांसद अमृतपाल सिंह और अन्य बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग पार करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास तक पहुंच गए।

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    इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। बाद में पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इससे पहले किसान संगठनों के प्रदर्शन के दौरान भी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी।

    स्कूलों की छुट्टी के समय लगे जाम के कारण अभिभावकों को बच्चों को घर ले जाने में घंटों इंतजार करना पड़ा। कई स्थानों पर सामान्य पांच-दस मिनट का सफर आधे घंटे से अधिक समय में पूरा हुआ। दफ्तर से लौटने वाले लोगों को भी लंबी देरी का सामना करना पड़ा, जबकि एंबुलेंस सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं को रास्ता बनाने में मशक्कत करनी पड़ी।

    15 अगस्त को फिर बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा ने 15 अगस्त को राजभवन की ओर मार्च का एलान किया है। बुधवार को इस संबंध में मोर्चा प्रतिनिधियों की पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के साथ बैठक भी हुई।

    बैठक में चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के आसपास एक बार फिर शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने और ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना है।

    प्रदर्शनों का सबसे बड़ा मंच बन चुका है चंडीगढ़

    पिछले कुछ वर्षों में चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन, पंजाब के कच्चे कर्मचारियों और ठेका कर्मियों के धरने, आंगनबाड़ी और आशा वर्करों के प्रदर्शन, बेरोजगार शिक्षकों और युवाओं के आंदोलन, हरियाणा के कर्मचारी संगठनों के प्रदर्शन तथा हाल में लद्दाख के मुद्दे पर सोनम वांगचुक के समर्थन में आयोजित मानव श्रृंखला जैसे कई बड़े कार्यक्रम हुए।

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    इन सभी आयोजनों के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। दरअसल, पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के सचिवालय, राजभवन और कई प्रमुख सरकारी कार्यालय चंडीगढ़ में स्थित हैं। यही कारण है कि दोनों राज्यों से जुड़े अधिकांश आंदोलन अंततः चंडीगढ़ पहुंचते हैं।

    चंडीगढ़ पुलिस पर भी बढ़ रहा दबाव

    हर बड़े प्रदर्शन के दौरान चंडीगढ़ पुलिस को बड़ी संख्या में जवान तैनात करने पड़ते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ट्रैफिक संचालन, बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन की जिम्मेदारी भी पुलिस पर होती है। इसके चलते शहर के अन्य क्षेत्रों में पुलिस बल की उपलब्धता भी प्रभावित होती है।

    व्यापार और जनजीवन भी होता है प्रभावित

    लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों का असर केवल ट्रैफिक तक सीमित नहीं रहता। शहर के बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट जाती है, कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पाते और सरकारी कामकाज भी प्रभावित होता है।

    अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी जाम और रूट डायवर्जन के कारण अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। चंडीगढ़ की संवैधानिक और प्रशासनिक स्थिति ने उसे पंजाब और हरियाणा के आंदोलनों का स्वाभाविक केंद्र बना दिया है।

    हालांकि आंदोलनों के मुद्दे दोनों राज्यों से जुड़े होते हैं, लेकिन जाम, समय की बर्बादी और रोजमर्रा की परेशानियों का सबसे बड़ा बोझ चंडीगढ़ के नागरिकों को उठाना पड़ता है। लगातार बढ़ती ऐसी परिस्थितियां अब केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि शहरी प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।

    बीते वर्षों के प्रमुख आंदोलन

    • 2020-21 : कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन, सचिवालय की ओर मार्च, कई मार्गों पर लंबा जाम।
    • 2022-23 : कच्चे कर्मचारियों और ठेका कर्मियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन।
    • आंगनबाड़ी व आशा वर्कर आंदोलन : मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन।
    • बेरोजगार शिक्षक व युवा संगठन : भर्ती और रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन।
    • सरकारी कर्मचारी व पेंशनर : डीए और वेतन संबंधी मांगों को लेकर विरोध।
    • 2023 : हरियाणा के सरपंचों और कर्मचारी संगठनों के आंदोलन।
    • 2024-25 : एमएसपी समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसानों का चंडीगढ़ कूच।
    • 2026 : वारिस पंजाब दे का प्रदर्शन और हालिया किसान आंदोलन, जिनसे शहर की कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा।

    आखिर चंडीगढ़ ही क्यों बनता है आंदोलन का केंद्र?

    • पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के सचिवालय चंडीगढ़ में हैं।
    • पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों का आधिकारिक आवास भी यहीं स्थित है।
    • दोनों राज्यों के कई प्रमुख प्रशासनिक कार्यालय चंडीगढ़ से संचालित होते हैं।
    • इसी वजह से प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए चंडीगढ़ का रुख करते हैं।
    • नतीजा, दोनों राज्यों के आंदोलनों का सबसे अधिक असर चंडीगढ़ के आम नागरिकों को झेलना पड़ता है।