चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में कैसे आएंगे शिक्षक? न रिक्रूटमेंट एजेंसी और ना डेपुटेशन कोटे के लिए पैनल
चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। भर्ती के लिए कोई एजेंसी नहीं मिल रही और डेपुटेशन पर भी शिक्षक नहीं आ रहे हैं। ऐसे में शिक्षक कहां से आएंगे।

नई नियुक्तियां नहीं हुई तो अप्रैल 2027 तक चंडीगढ़ के स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बढ़ जाएगा। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
भर्ती एजेंसी न मिलने से शिक्षकों की कमी
डेपुटेशन पर पंजाब से एक भी नाम नहीं
केंद्रीय सेवा नियमों से अप्रैल 2027 तक संकट
सुमेश ठाकुर, चंडीगढ़। शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए न तो कोई रिक्रूटमेंट एजेंसी आ रही है और न ही डेपुटेशन पर पैनल आ रहा है। ऐसे में परेशानी है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक कहां से आएंगे। विभाग शिक्षक भर्ती के लिए रिक्रूटमेंट एजेंसी की तलाश में तीन बार टेंडर कर चुका है, लेकिन एक ही एजेंसी नहीं मिली।
दूसरी तरफ डेपुटेशन कोटे के तहत मांगे 94 पद भरने थे जिसमें शिक्षक, प्रिंसिपल और हेडमास्टर के पद थे। 94 पदों के लिए पंजाब से एक भी नाम नहीं आया है जबकि हरियाणा ने 17 पदों के लिए 40 नाम भेजे हैं।
विभाग ने दोनों राज्यों से 14 अगस्त तक पैनल मांगे थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी पंजाब की ओर से पैनल नहीं भेजा गया। मौजूदा स्थिति यही रही तो अप्रैल 2027 तक चंडीगढ़ के स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बढ़ जाएगा।
60:40 का फाॅर्मूला भी पड़ रहा भारी
वर्ष 1991 से स्कूल शिक्षा विभाग में 820 पदों पर 60:40 के अनुपात से पंजाब और हरियाणा के टीचर्स की नियुक्तियां होती रही हैं। 60 प्रतिशत शिक्षक पंजाब और 40 प्रतिशत हरियाणा से आते हैं। इस समय दोनों राज्यों में अपनी शिक्षकों की कमी होने के कारण चंडीगढ़ के लिए शिक्षक भेजना मुश्किल है।
केंद्रीय सेवा नियम ने बढ़ाई नई उलझन
चंडीगढ़ में केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद डेपुटेशन पर आने वाले कर्मचारियों के कार्यकाल को तीन, पांच और सात वर्ष तक सीमित कर दिया है। अप्रैल 2027 में पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके शिक्षकों को वापस भेजने की तैयारी है, यानि जिस समय विभाग को अतिरिक्त शिक्षकों की सबसे ज्यादा जरूरत होगी, उसी समय कई शिक्षक वापस जाएंगे।
भर्ती नियम तय नहीं, प्रिंसिपल के पद भी नहीं
केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बावजूद शिक्षा विभाग में भर्ती और प्रमोशन के नियम तय नहीं हुए हैं। विभाग के पास प्रिंसिपल के पद ही क्रिएट नहीं हैं। वहीं स्कूलों में पढ़ाने के लिए टीजीटी और पीजीटी टीचर्स की भारी कमी है। जिससे स्कूल की व्यवस्था चरमराना स्वाभाविक है।
डेपुटेशन कोटे को खत्म करने के लिए ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने केंद्र सरकार से अपील है। हमारी मांग है कि अपनी भर्ती कर चंडीगढ़ केडर के टीचर्स से कमी को दूर किया जाए। -भाग सिंह खैरों, चेयरमैन ज्वाइंट एक्शन कमेटी कर्मचारी यूनियन
डेपुटेशन पर टीचर्स बुलाने से यूटी केडर के टीचर्स की प्रमोशन नहीं होती। सैकड़ों टीचर्स बिना प्रमोशन के सेवानिवृत हो चुके हैं। हमारी प्रशासन से अपील है कि केंद्रीय सेवा नियम के तहत भर्ती नियम तय करके प्रमोशन की जाए और नई भर्ती हो। डेपुटेशन के सहारे शिक्षा विभाग नहीं चल सकता। -संतोष, प्रेसिडेंट गर्वमेंट टीचर्स यूनियन।
डेपुटेशन कोटे तुरंत प्रभाव से खत्म होने चाहिए और चंडीगढ़ प्रशासन को अपनी भर्ती करनी चाहिए। पैनल नहीं आना या भर्ती के लिए एजेंसी न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। -स्वर्ण सिंह कंबोज, प्रेसिडेंट, यूटी केडर इंप्लाइज यूनियन
