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    चंडीगढ़ में बुजुर्ग दंपति को 15 दिनों तक घर में रखा डिजिटल अरेस्ट, साइबर ठगों ने हड़पे दो करोड़ रुपये

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 09:08 AM (GMT+05:30)

    चंडीगढ़ में एक बुजुर्ग दंपति 15 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' के शिकार हुए, जिसमें साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उनसे 2.15 करोड़ रुपये ठग लिए। ...और पढ़ें

    चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट की बड़ी वारदात (AI Generated फोटो)

    चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट की बड़ी वारदात (AI Generated फोटो)

    HighLights

    1. बुजुर्ग दंपति से 2.15 करोड़ रुपये की ठगी।

    2. साइबर ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया।

    3. 15 दिन तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया।

    मनोज बिष्ट, चंडीगढ़। साइबर अपराधियों ने सेक्टर-47 में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति को 15 दिनों तक कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 2 करोड़ 15 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली।

    खुद को सीबीआइ अधिकारी बताने वाले ठगों ने दंपति को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनकी जीवनभर की जमा पूंजी हड़प ली। साइबर थाना पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक से सेवानिवृत्त पीड़ित दंपति ने पुलिस को बताया कि उन्हें करीब 15 दिन पहले एक फोन काल आई।

    काल करने वाले ने खुद को मुंबई सीबीआइ का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल ड्रग्स तस्करी और मनी लान्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है। आरोपित ने दावा किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।

    ठगों ने दंपति को सख्त हिदायत दी कि वह इस मामले की जानकारी किसी रिश्तेदार, मित्र या पड़ोसी को न दें। साथ ही यह भी धमकी दी गई कि यदि उन्होंने किसी को बताया तो उनके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई होगी। गिरफ्तारी के डर से दंपति पूरी तरह साइबर ठगों के जाल में फंस गए।

    घर की नकदी से शुरू हुई ठगी, सोना बिकवाने तक पहुंचे ठग

    ठगों ने दंपति को कथित जांच से बचाने के नाम पर रकम जमा करवाने के लिए कहा। शुरुआत में घर में रखी नकदी विभिन्न खातों में आरटीजीएस और अन्य माध्यमों से ट्रांसफर करवाई गई।

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    इसके बाद दंपति ने अपने रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लेकर आरोपितों के खातों में जमा करवा दिए। जब इससे भी ठगों का मन नहीं भरा तो उन्होंने दंपति को घर में रखा सोना बेचकर नकदी जुटाने के लिए कहा। दंपति ने सोना बेचकर भी बड़ी रकम साइबर ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी। इस तरह 15 दिनों के भीतर कुल 2.15 करोड़ रुपये से अधिक की रकम आरोपितों तक पहुंच गई।

    मकान गिरवी रखने का दबाव बनाया तो खुली ठगी की पोल : ठगों ने बाद में दंपति पर मकान के दस्तावेज गिरवी रखकर बैंक से लोन लेने और वह राशि भी जमा करवाने का दबाव बनाया। अपनी पूरी जमा पूंजी और आभूषण गंवा चुके दंपति ने जब ऐसा करने से इनकार कर दिया तो आरोपितों ने उनसे संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद दंपति को संदेह हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है।

    उन्होंने परिजनों को पूरी बात बताई और फिर साइबर थाना पुलिस से संपर्क किया। ठगी की इतनी बड़ी वारदात के बाद बुजुर्ग दंपति गहरे सदमे में हैं। उनका बेटा नौकरी के कारण शहर से बाहर रहता है और दंपति चंडीगढ़ में अकेले रह रहे थे। साइबर थाना पुलिस ने संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन की जांच शुरू कर दी है।

    क्या है डिजिटल अरेस्ट?

    डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ठग खुद को सीबीआइ, ईडी, पुलिस, कस्टम या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो काल या फोन पर लोगों को डराते हैं और उन्हें घंटों या दिनों तक मानसिक दबाव में रखते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी या जांच से बचाने के नाम पर पैसे ऐंठे जाते हैं।

    विशेषज्ञों की चेतावनी 

    साइबर विशेषज्ञों तरुण मल्होत्रा का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट भारतीय कानून में कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी फोन, वीडियो काल या मैसेज के माध्यम से किसी व्यक्ति को घर में रहने का आदेश नहीं देती और न ही जांच के नाम पर निजी खातों में रकम जमा करवाती है।

    यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तरीके से भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। खासकर अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक ऐसे गिरोहों के आसान शिकार बन रहे हैं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी, पुलिस या जांच अधिकारी के नाम पर आने वाली संदिग्ध काल से सतर्क रहें और ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

    डिजिटल अरेस्ट ठगी के बड़े मामले

    1. बुजुर्ग से 46 लाख रुपये की ठगी (मार्च 2026)साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग को झूठे केस में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर 46 लाख रुपये की ठगी की। जांच करते हुए चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने गुजरात के गांधीधाम से तीन आरोपित (रमेश, योगेश और हितेश) को गिरफ्तार किया।

    2. बुजुर्ग दंपती से 38 लाख रुपये की ठगी (जनवरी 2026)ठगों ने मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बनकर दंपती को मनी लान्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। इस डिजिटल अरेस्ट मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया।

    3. महिला से 1 करोड़ रुपये की ठगी (दिसंबर 2025)ठगों ने खुद को टेलीकाम आपरेटर, दिल्ली पुलिस, और सीबीआइ अधिकारी बताकर एक महिला को डराया और उससे एक करोड़ रुपये ठग लिए। समय पर 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत करने के कारण पुलिस ने पीड़िता के लगभग 36 लाख रुपये होल्ड करवा लिए थे। इस गिरोह के 19 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।

    4. रिटायर्ड कर्नल से 3.41 करोड़ रुपये की ठगी, ठगों ने एक रिटायर्ड कर्नल को डिजिटल अरेस्ट कर और उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 3.41 करोड़ रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली थी।

    5. सेक्टर-10ए की रहने वाली 70 साल की महिला चीफ आर्किटेक्ट को डिजिटल अरेस्ट में रखकर 2.5 करोड़ रुपए की ठगी, साइबर ठगों ने खुद को ट्राई (टेलिकाम रेगुलेटरी अथारिटी आफ इंडिया), सीबीआइ और सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए महिला को डिजिटल अरेस्ट किया था।