ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर पर ब्रेक; पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट की रोक, चंडीगढ़ प्रशासन को अंतिम फैसले का इंतजार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई और छंटाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले से परियोजना ...और पढ़ें

ट्रिब्यून चौक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर का नक्शा।
HighLights
अंतिम फैसले तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा।
फ्लाईओवर को मास्टर प्लान के खिलाफ बताया गया।
प्रशासन ने 2,799 पौधे लगाने का भरोसा दिया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। शहर के बहुचर्चित ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई और छंटाई पर अंतरिम रोक लगा दी।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ट्रिब्यून चौक के आसपास किसी भी आम या अन्य पेड़ को अगली सुनवाई तक न तो काटा जाएगा और न ही उसकी शाखाएं हटाई जाएंगी।
इस आदेश के साथ फ्लाईओवर के लिए जमीन साफ करने की प्रक्रिया फिलहाल ठहर गई है।अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले पर पहले ही विस्तृत बहस हो चुकी है और याचिका का अंतिम निपटारा शीघ्र होने की संभावना है। ऐसे में यथास्थिति बनाए रखना न्यायोचित होगा।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम आदेश अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। यह मामला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर को चंडीगढ़ के मास्टर प्लान, विरासत स्वरूप और शहरी नियोजन के खिलाफ बताया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तनु बेदी ने दलील दी कि मास्टर प्लान-2031 के अनुसार चंडीगढ़ को पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के अनुकूल शहर के रूप में विकसित किया गया था, जबकि फ्लाईओवर जैसे ढांचे शहर की दृश्यात्मक पहचान, हरित पट्टियों और गैर-मोटर चालित परिवहन व्यवस्था को नुकसान पहुंचाएंगे।
उन्होंने तर्क दिया कि निजी वाहनों के लिए लगातार बुनियादी ढांचा बढ़ाना केवल जाम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करेगा और यह परियोजना चंडीगढ़ की विरासत के लिए मृत्यु घंटी साबित हो सकती है।
वहीं यूटी प्रशासन की ओर से वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता अमित झांजी ने परियोजना का बचाव करते हुए कहा कि मास्टर प्लान फ्लाईओवर निर्माण की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि विरासत क्षेत्र केवल सेक्टर-1 से 30 तक सीमित है, पूरा शहर नहीं। प्रशासन ने अदालत को बताया कि पूर्व में इस परियोजना पर लगी रोक हट चुकी है और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी वापस ली जा चुकी है।
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प्रशासन ने बढ़ती आबादी और ट्राईसिटी क्षेत्र के 15 लाख से अधिक जनसंख्या दबाव का हवाला देते हुए फ्लाईओवर को यातायात प्रबंधन की कार्यात्मक आवश्यकता बताया। साथ ही 5:1 अनुपात में 2,799 पौधे लगाने और सभी पर्यावरणीय मंजूरियां लेने का भरोसा भी दिया।