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    'अपनी सरकार के गिरने की चिंता है...', राष्ट्रपति से मुलाकात में पंजाब के मुद्दे न उठाने पर मजीठिया ने CM भगवंत मान को घेरा

    Updated: Tue, 05 May 2026 08:00 PM (IST)

    शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान पंजाब के गंभीर मुद्दे न उठाने पर कड़ी निंदा की ...और पढ़ें

    अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया (जागरण फोटो)

    अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया (जागरण फोटो)

    HighLights

    1. मजीठिया ने राष्ट्रपति से पंजाब मुद्दे न उठाने पर मान को घेरा।

    2. मुख्यमंत्री पर अपनी सरकार बचाने की चिंता का आरोप लगाया।

    3. जेल में बंद सिखों की रिहाई, एसवाईएल जैसे मुद्दे नहीं उठाए।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के नेता व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने राष्ट्रपति से मीटिंग के दौरान पंजाब का कोई भी मुद्दा न उठाने पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की कड़ी निंदा की है।

    उन्होंने कहा कि आज पूरे पंजाब और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से मिलेंग और मुख्यमंत्री जेल में बंद सिखों की रिहाई, एसवाईएल, पंजाब में ड्रग्स की महामारी, गैंगलैंड, खराब कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और कर्ज समेत पंजाब के गंभीर मुद्दे राष्ट्रपति के सामने उठाएंगे और राष्ट्रपति से उन्हें हल करने की गुजारिश करेंगे।

    मजीठिया ने कहा कि उन्हें पंजाब की ज़रा भी चिंता होती तो वे ऐसा करते, क्योंकि मुख्यमंत्री को पंजाब से ज़्यादा आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा सदस्यों और अपनी सरकार गिरने की चिंता थी।

    सीएम पर कसा निशाना

    मजीठिया ने कहा कि राष्ट्रपति से मिलकर बाहर आने के बाद उन्होंने खुद यह बात कही। उनकी बातचीत से यह भी साफ हो गया कि उन्होंने राष्ट्रपति के सामने पंजाब के कितने मुद्दे उठाए हैं। मजीठिया ने कहा कि अपनी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने न तो राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा और न ही पंजाब के मुद्दों को लेकर एक बार भी उनसे मिले, लेकिन अब जब उनकी सरकार जाने वाली है, तो पंजाब के मुद्दों पर बात करने के बजाय वे अपनी गिरती सरकार को बचाने की चिंता में राष्ट्रपति से मिलने चले गए हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

    उन्होंने कहा कि विधानसभा का स्पेशल सेशन भी अपनी गिरती सरकार को बचाने के लिए ड्रामा के तौर पर बुलाया गया था और उस दौरान भी मुख्यमंत्री ने सदन में अपने व्यवहार से देश और विदेश में पंजाब को बदनाम किया था। उन्होंने पंजाबियों के सामने अपना चेहरा बेनकाब कर दिया है कि उनको पंजाब के मुद्दों की नहीं बल्कि अपनी ओर अपनी सरकार की चिंता है।