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    बेअदबी पर अब उम्रकैद और भारी जुर्माना, पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में आज पेश होगा ऐतिहासिक 'सत्कार एक्ट 2026'

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 09:10 AM (IST)

    पंजाब सरकार आज विधानसभा में 'जागत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026' पेश करेगी। यह बिल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर उम्रकैद और 5-25 लाख ज ...और पढ़ें

    पंजाब सरकार आज विधानसभा में 'जागत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026' पेश करेगी (फाइल फोटो)

    पंजाब सरकार आज विधानसभा में 'जागत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026' पेश करेगी (फाइल फोटो)

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    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब सरकार की ओर सोमवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। इस दौरान सरकार शनिवार को कैबिनेट की ओर से मंजूर किए गए जागत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026 को पेश करेगी। विधानसभा में इस बिल को मंजूर करवाने में सरकार को कोई परेशानी नहीं होगी, हालांकि इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी दिलाना बड़ी चुनौती रहेगी।

    इसका मुख्य कारण बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने पर जो सजा के प्रविधान किए गए हैं, वे केंद्रीय कानून से टकराते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राज्यपाल इस बिल को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेज दें।

    हालांकि राज्य सरकार का तर्क है कि यह स्टेट बिल है और इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं होती। सरकार की ओर तैयार किए गए बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और पांच से 25 लाख जुर्माने का प्रविधान किया गया है।

    उधर, कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सरकार की ओर से बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र को एक नाटक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार वर्षों में सरकार एक भी दोषी को सजा नहीं दिला सकी है।

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    सरकार मुश्किल हालात से बचने के लिए बार-बार विशेष सत्रों का सहारा लेती रही है। अगर सरकार की नीतियां वास्तव में सच्ची होतीं, तो वह इस तरह का कानून तैयार करने से पहले संबंधित पक्षों, विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करती।

    2016 और 2018 में भी धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को लेकर बिल विधानसभा में पेश किए जा चुके हैं। 2016 में तो इसे राष्ट्रपति ने कहते हुए वापिस कर दिया कि सभी धर्मों के ग्रंथों के अपमान पर एक जैसी सजा ही दी जा सकती है, अलग-अलग नहीं।

    इस बिल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान पर उम्र कैद और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर दस साल की सजा का प्रविधान था। 2018 में सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए सभी धर्मों को शामिल कर लिया लेकिन आठ साल गुजरने के बावजूद राष्ट्रपति से इसे मंजूरी नहीं मिली है।