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    160 करोड़ गबन केस! आरोपित रजत डागर पंचकूला Court में पेश, छह दिन का रिमांड मिला, बैंक अधिकारी की तलाश में छापेमारी

    Updated: Fri, 27 Mar 2026 03:49 PM (GMT+05:30)

    पंचकूला के 160 करोड़ रुपये के एफडी गबन मामले में जांच जारी है। आरोपित रजत धारा को कोर्ट में पेश किया गया। उसके और एक अन्य व्यक्ति के खातों में 60 करोड ...और पढ़ें

    करोड़ों के घोटाले में गिरफ्तार आरोपित रजत धारा को कोर्ट में लेकर जाती एसीबी की टीम।

    करोड़ों के घोटाले में गिरफ्तार आरोपित रजत धारा को कोर्ट में लेकर जाती एसीबी की टीम।

    HighLights

    1. नगर निगम की एफडी के नाम पर घोटाला।

    2. कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारियों की रही भूमिका।

    3. फर्जी मुहरों का इस्तेमाल किया गया।

    जागरण संवाददाता, पंचकूला। नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के एफडी गबन मामले में आरोपितों की धर-पकड़ तेज है। शुक्रवार को आरोपित रजत डागर को कोर्ट में पेश किया गया। 

    एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बताया कि रजत और एक अन्य व्यक्ति के खातों में लगभग 60 करोड़ की ट्रांजेक्शन हुई है, जिसके बाद इन पैसों को आगे ट्रांसफर किया गया।

    एसीबी ने रजत का 10 दिन का रिमांड मांगा, लेकिन कोर्ट ने छह दिन के रिमांड मंजूर किया। अब जांच एजेंसी उन लोगों का पता लगाएगी जिनके खातों में रुपये ट्रांसफर किए गए।

    इस मामले में एसीबी कोटक महिंद्रा बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दलीप राघव को गिरफ्तार कर चुकी है, जोकि रिमांड पर चल रहा है। बैंक के वरिष्ठ अधिकारी पुष्पेंद्र की तलाश में छापेमारी जारी है।

    जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने दस्तावेजों पर नकली मुहरों का इस्तेमाल किया। एसीबी अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये फर्जी मुहरें कहां तैयार करवाई गईं और उनकी बरामदगी कैसे सुनिश्चित की जाए।

    साथ ही पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को जोड़ते हुए अन्य संलिप्त लोगों की पहचान भी की जा रही है। एसीबी का दावा है कि आरोपित दलीप ने लेटर-वाउचर और मुहरे अपने पैतृक गांव रानामठ, जिला कासगंज (उत्तर प्रदेश) स्थित घर में रखी हैं, जिन्हें बरामद किया जाना है।

    मास्टरमाइंड स्टडी लीव पर

    इस घोटाले का मास्टरमाइंड बैंक का एक वरिष्ठ अधिकारी बताया जा रहा है, जो पहले सेक्टर-11 शाखा का प्रमुख रह चुका है और फिलहाल स्टडी लीव पर है। वह पंचकूला के सेक्टर-2 में रहता है। सरकारी राशि एक निजी कंपनी में ट्रांसफर कर आगे लोन के रूप में बांटी गई और उसका ब्याज कथित तौर पर मास्टरमाइंड ने अपने खाते में लिया।

    जांच के दौरान नगर निगम के आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, मौजूदा सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर, पूर्व डीएमसी और पूर्व अकाउंट्स ऑफिसर से भी पूछताछ की गई है। संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच और सत्यापन जारी है।