विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

PU छात्र संघ चुनाव पंजाब-हरियाणा की सियासत की नर्सरी; यहां से कई नेता विधानसभा और संसद तक पहुंचे 

Published: Mon, 31 Aug 2026 07:05 AM (IST)

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव को पंजाब-हरियाणा की राजनीति की नर्सरी माना जाता है, जहां से कई बड़े नेता निकले ...और पढ़ें

पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति ने कई चेहरों को दिया बड़ा मंच। (एआई जनरेटेड फोटो)

पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति ने कई चेहरों को दिया बड़ा मंच। (एआई जनरेटेड फोटो)


HighLights

  1. पीयू छात्र संघ चुनाव पंजाब-हरियाणा की राजनीति की नर्सरी।

  2. कई बड़े नेता छात्र राजनीति से निकलकर संसद तक पहुंचे।

  3. राजनीतिक दल इसे भविष्य के नेताओं की पहचान का मंच मानते हैं।

राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) छात्र संघ चुनाव के लिए सोमवार को मतदान होगा। यह महज 15-16 हजार युवाओं के बीच होने वाला चुनाव नहीं है। पीयू कैंपस की राजनीति पंजाब-हरियाणा की सियासत की नर्सरी है। 

पीयू से जुड़े कई ऐसे चेहरे हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति या कैंपस की सक्रिय राजनीति से शुरुआत की। कैंपस में सक्रियता के दौरान संगठन चलाना, चुनाव लड़ना, मुद्दे उठाना और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना सीखा। बाद में विधानसभा, लोकसभा और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। 

 

पीयू के इस कैंपस में आज जो युवा पोस्टर, भाषण और चुनावी रणनीति सीख रहे हैं। इनमें से कुछ आने वाले वर्षों में पंजाब, हरियाणा और राष्ट्रीय राजनीति के मंच पर दिखाई दे सकते हैं। चंडीगढ़ और आसपास की राजनीति में भी पीयू की छात्र राजनीति का प्रभाव दिखाई देता है। 

पंजाब की राजनीति पर क्यों पड़ता है असर?

पीयू की खासियत यह है कि यह केवल चंडीगढ़ का कैंपस नहीं है। यहां पंजाब के लगभग हर जिले के साथ-साथ हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों से भी विद्यार्थी आते हैं। यही वजह है कि कैंपस में बनने वाले राजनीतिक नेटवर्क आगे चलकर अलग-अलग राज्यों में काम आते हैं।

इसका असर मौजूदा चुनाव में भी दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी ने इस बार अपने छात्र संगठन के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी लोकसभा सांसद गुरमीत सिंह ‘मीत हेयर’ और विधायक अमृतपाल सिंह सुखानंद को सौंपी है।

इससे साफ है कि राजनीतिक दल छात्र चुनाव को केवल विश्वविद्यालय की आंतरिक राजनीति नहीं मान रहे, बल्कि इसे भविष्य के संगठनात्मक आधार के रूप में भी देख रहे हैं।

हरियाणा के लिए भी अहम है पीयू का चुनाव

पीयू में हरियाणा के विद्यार्थियों की अच्छी संख्या है। छात्र राजनीति में हरियाणा आधारित संगठन आईएनएसओ की मौजूदगी भी इसी वजह से महत्वपूर्ण रहती है। पिछले वर्षों में हरियाणा के छात्र नेताओं ने पीयू की राजनीति से निकलकर राज्य की युवा राजनीति में जगह बनाई है। दिव्यांशु बुद्धिराजा इसका बड़ा उदाहरण हैं।

अब बदली है छात्र राजनीति की तस्वीर

पीयू की छात्र राजनीति पिछले दशक में काफी बदली है। कभी सोपू और पुसू जैसे स्थानीय संगठनों का दबदबा था, लेकिन अब एबीवीपी, एनएसयूआई, एसएफआई, सीवाईएसएस और अन्य राजनीतिक विचारधारा से जुड़े संगठन ज्यादा प्रभावशाली हो गए हैं। 2018 के बाद राष्ट्रीय राजनीतिक संगठनों की भूमिका और ज्यादा दिखाई देने लगी है।

इस बार भी चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एनएसयूआई और स्टूडेंट फ्रंट के बीच संभावित तालमेल के संकेत मिले हैं, जबकि अलग-अलग छात्र संगठन अपने-अपने सामाजिक और क्षेत्रीय आधार को मजबूत करने में जुटे हैं।

कैंपस का चुनाव, नजर 2027 और आगे की राजनीति पर

पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में पीयू चुनाव का महत्व और बढ़ गया है। छात्र राजनीति में सक्रिय होने वाले युवाओं का बड़ा हिस्सा आने वाले वर्षों में युवा कांग्रेस, भाजपा, आप, अकाली दल और अन्य राजनीतिक संगठनों में भूमिका निभा सकता है।

इसलिए पीयू का चुनाव आज भले ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव चुनने का मुकाबला हो, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए यह भविष्य के कार्यकर्ताओं और नेताओं की पहचान करने का मैदान भी है।

कैंपस में पड़ने वाला हर वोट विधानसभा या लोकसभा का वोट नहीं है, लेकिन यहां बनने वाला राजनीतिक नेटवर्क कई बार वर्षों बाद चुनावी मैदान में दिखाई देता है। यही वजह है कि पीयू की छात्र राजनीति को सिर्फ विश्वविद्यालय की राजनीति कहना शायद सही नहीं होगा।

छात्र राजनीति ने कई चेहरों को दिया बड़ा मंच

राजीव प्रताप रूडी: पीयू के छात्र रहे राजीव प्रताप रूडी ने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया। बाद में भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। वह कई बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्र में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।

मलविंदर सिंह कंग: पीयू कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष मलविंदर सिंह कंग ने छात्र राजनीति से शुरुआत के बाद आम आदमी पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई। 2024 में श्री आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर संसद पहुंचे।

दिव्यांशु बुद्धिराजा: पीयूसीएससी के पूर्व अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा ने छात्र राजनीति के बाद हरियाणा एनएसयूआई में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। 2024 में कांग्रेस ने उन्हें करनाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हरियाणा की युवा राजनीति में सक्रिय चेहरों में शामिल हैं।

सुषमा स्वराज: देश की प्रमुख महिला नेताओं में शुमार सुषमा स्वराज का भी पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंध रहा। छात्र जीवन से राजनीतिक सक्रियता शुरू करने के बाद वह हरियाणा की राजनीति से होते हुए राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष तक पहुंचीं और विदेश मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं।

मनीष तिवारी: चंडीगढ़ के सांसद रहे मनीष तिवारी भी पीयू से जुड़े रहे हैं। छात्र जीवन में राजनीतिक सक्रियता के बाद उन्होंने कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में जगह बनाई और केंद्र में मंत्री भी रहे। बाद में लोकसभा सांसद के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चंडीगढ़ के सांसद रहे पवन कुमार बंसल, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन जैसे नाम पीयू से जुड़े रहे हैं।