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पंजाब सरकार की नई पहल: अब AI लेगा ड्राइविंग टेस्ट, HAMS तकनीक से चुटकी में मिलेगा लाइसेंस

Published: Fri, 24 Jul 2026 03:17 PM (IST)

पंजाब सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए AI आधारित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT) सिस्टम 'HAMS' लागू किया है।

पंजाब सरकार की नई पहल: अब AI लेगा ड्राइविंग टेस्ट (फाइल फोटो)

पंजाब सरकार की नई पहल: अब AI लेगा ड्राइविंग टेस्ट (फाइल फोटो)


HighLights

  1. AI आधारित HAMS तकनीक से ड्राइविंग टेस्ट अब होगा पारदर्शी

  2. आइरिस, फेस स्कैन और बायोमेट्रिक से होगी आवेदक की पहचान सुनिश्चित

  3. मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, धोखाधड़ी रुकेगी, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। भारत में लगभग हर 4 मिनट में एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में जान गवां देते है। हर साल दुनिया भर में लगभग 13.5 लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो जाती है और लाखों लोग घायल होते हैं। इसलिए सुरक्षित ड्राइविंग और सही तरीके से लाइसेंस जारी करना बहुत जरूरी है।

इसी ड्राइविंग सुरक्षा को लेकर पंजाब सरकार ने भी एक पहल की है जिससे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट देने पहुंचे लोगों को अब सर्वर की खराबी के कारण घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

पंजाब सरकार AI आधारित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT) सिस्टम विकसित और लागू कर रही है, ताकि ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट पूरी तरह स्वचालित, पारदर्शी और तेज हो सके। इस नई तकनीक का नाम HAMS (हारनेसिंग ऑटोमोबाइल फॉर सेफ्टी) है।

क्या है हार्नेसिंग ऑटोमोबाइल फॉर सेफ्टी तकनीक?

इस तकनीक में आवेदक की पहचान आइरिस स्कैन, फेस स्कैन और बायोमेट्रिक से की जाएगी। वहीं, कैमरे और सेंसर गाड़ी चलाने के तरीके पर नजर रखेंगे और AI अपने आप अंक देगा।

इसका मकसद ड्राइविंग टेस्ट में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना, धोखाधड़ी रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि टेस्ट वही व्यक्ति दे जिसने आवेदन किया है। इससे ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया तेज, आसान और निष्पक्ष बनेगी।स

क्या है HAMS के लाभ?

पंजाब सरकार ने इस AI आधारित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक सिस्टम HAMS के लाभ बताए कि:

  1. यह नई तकनीक ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट को आसान, तेज और अधिक सटीक बनाएगी।
  2. इससे परिवहन विभाग को सही तरीके से प्रशिक्षित लोगों को ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में मदद मिलेगी, जिससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी।
  3. ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने में लगने वाला इंतजार (वेटिंग टाइम) कम होगा।
  4. धोखाधड़ी पर रोक लगेगी, क्योंकि किसी दूसरे व्यक्ति (प्रॉक्सी) द्वारा किसी और की जगह ड्राइविंग टेस्ट देना संभव नहीं होगा।

कैसे काम करता है HAMS?

AI आधारित HAMS (हारनेसिंग ऑटोमोबाइल फॉर सेफ्टी) सिस्टम में सबसे पहले आवेदक की पहचान फेस स्कैन, आइरिस स्कैन और बायोमेट्रिक के जरिए की जाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि टेस्ट वही व्यक्ति दे रहा है जिसने आवेदन किया है।

इसके बाद वाहन ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर चलता है, जहां लगे कैमरे, सेंसर और AI तकनीक वाहन की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। सिस्टम लेन बदलने, पार्किंग, वाहन नियंत्रण, स्पीड और अन्य ड्राइविंग नियमों का खुद ही मूल्यांकन करता है। टेस्ट पूरा होने पर AI तुरंत अंक देकर पास या फेल का परिणाम जारी करता है।

परियोजना के रूप में पहले ही लागू किया 

यह AI सिस्टम मोहाली क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) में पायलट परियोजना के रूप में पहले ही लागू किया जा चुका है। यहां AI आधारित ड्राइविंग टेस्ट के बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।

पहले जहां ड्राइविंग टेस्ट का मूल्यांकन मैन्युअल रूप से होता था, वहीं अब AI की मदद से टेस्ट अधिक तेज, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है।

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