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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    अब तक क्यों तय नहीं हुई ‘गैंगस्टर’ की परिभाषा? हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को लगाई फटकार; जानें पूरा मामला

    Updated: Tue, 08 Apr 2025 09:15 AM (IST)

    Punjab News पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा है कि गैंगस्टर शब्द की परिभाषा क्यों तय नहीं की गई है। अदालत ने सरकार को ...और पढ़ें

    हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा, अब तक क्यों तय नहीं हुई ‘गैंगस्टर’ की परिभाषा (File Photo)
    हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा, अब तक क्यों तय नहीं हुई ‘गैंगस्टर’ की परिभाषा (File Photo)

    HighLights

    1. पंजाब कंट्रोल ऑफ आर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट की वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा
    2. संगठित अपराध नियंत्रण इकाई व एंटी गैंग्सटर टास्क फोर्स के गठन के दस्तावेज मांगे

    दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर ‘गैंगस्टर’ शब्द की परिभाषा क्यों तय नहीं की गई है। अदालत ने पंजाब सरकार को यह भी निर्देश दिया कि संगठित अपराध नियंत्रण इकाई व एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स के गठन से संबंधित सभी दस्तावेज कोर्ट के समक्ष पेश किए जाएं। इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि पंजाब कंट्रोल ऑफ आर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है जो इस समय गृह विभाग के विचाराधीन है।

    8 अप्रैल को जवाब दाखिल करने का आदेश

    यह मामला मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इससे पहले तीन अप्रैल को जब यह मामला जस्टिस हरकेश मनुजा की अदालत में आया तो उन्होंने पंजाब पुलिस के एआईजी स्तर के अधिकारी से यह स्पष्ट करने को कहा कि ‘गैंगस्टर’ शब्द की परिभाषा राज्य के किसी भी कानून में दी गई है या नहीं।

    इस पर एआईजी ने अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा पर अदालत ने सुनवाई आठ अप्रैल के लिए टालते हुए राज्य को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में अपना जवाब दाखिल करे।

    अदालत ने राज्य सरकार से मांगी ये जानकारी

    याचिकाकर्ता के वकील ने भी अदालत में कहा कि हैरानी की बात यह है कि ‘गैंगस्टर’ शब्द की कोई विधिक परिभाषा किसी भी अधिनियम में नहीं दी गई है।

    इससे पहले अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या संगठित अपराधों से निपटने के लिए कोई अलग कानून बनाया गया है।

    साथ ही यह भी पूछा गया था कि राज्य भर में कितने ऐसी एफआईआर दर्ज हुई हैं जिनमें आम लोगों ने ‘गैंगस्टर’ से जान का खतरा होने की बात कही है।

    सिमरजीत सिंह की याचिका पर हुई सुनवाई

    यह आदेश अदालत ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए जो गुरदासपुर निवासी 42 वर्षीय सिमरजीत सिंह द्वारा दायर की गई है। याचिका में उन्होंने पंजाब के एडीजीपी (सुरक्षा) सुधांशु श्रीवास्तव के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग की है।

    वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल को कुछ अपराधियों द्वारा दर्ज की गई एफआईआर वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है और इसी कारण उन्होंने सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

    उन्होंने बताया कि सिमरजीत सिंह को गैंगस्टर लवप्रीत सिंह उर्फ लवी, जो कुख्यात अपराधी सुखमीत पाल सिंह उर्फ सुख भिखारीवाल का सहयोगी है, की ओर से जान से मारने की धमकी मिली है।

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