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पंजाब कांग्रेस में खत्म होगी कलह! लक्ष्य- चन्नी और वडिंग गुटों में संतुलन, क्या विजय इंदर सिंगला संभालेंगे कमान?

By Anuj SharmaEdited By: Anuj Sharma
Published: Thu, 01 Oct 2026 09:01 AM (IST)

पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी समाप्त करने के लिए सचिन पायलट की रिपोर्ट के बाद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे ...और पढ़ें

चरणजीत सिंह चन्नी, विजय सिंघला और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग।

चरणजीत सिंह चन्नी, विजय सिंघला और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग।

HighLights

  1. पंजाब कांग्रेस में 2027 चुनाव से पहले गुटबाजी समाप्त करने की रणनीति।

  2. हाईकमान का लक्ष्य चन्नी-वड़िंग गुटों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाना।

  3. विजय इंदर सिंगला को निष्पक्ष प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर विचार।

अनुज शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंजाब कांग्रेस में जारी गुटबाजी को समाप्त करने के लिए पार्टी हाईकमान ने नई रणनीतिक तैयार की है। पार्टी नेतृत्व का मुख्य मकसद प्रदेश संगठन की कमान किसी एक ऐसे चेहरे को सौंपना है, जो अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के दोनों खेमों को एक साथ एक मंच पर ला सके।

हाईकमान का मानना है कि 2027 के चुनावों में उतरने से पहले दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाना ही पार्टी की जीत की एकमात्र रास्ता है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने करीब 3 सप्ताह तक राज्य के वरिष्ठ नेताओं, मौजूदा सांसदों, विधायकों और संगठन से जुड़े अधिकारियों से अलग-अलग स्तर पर संपर्क किया। बातचीत का पूरा निचोड़ उन्होंने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में तैयार कर उसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को सौंपा।

सूत्रों के अनुसार पायलट की रिपोर्ट में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष और सभी गुटों को एक मंच पर लाने में आ रही चुनौतियों का प्रमुखता से उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार, गुटबाजी के चलते संगठन की स्थिति प्रभावित हो रही है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नेतृत्व परिवर्तन और नए चेहरे को कमान सौंपना जरूरी हो गया है।

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संतुलन बनाने की कोशिशें तेज

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के बीच अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे की पेशकश और पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम नए अध्यक्ष के रूप में सामने आने से सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी हाईकमान का मुख्य मकसद एक ऐसे चेहरे को कमान सौंपना है जो राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी दोनों गुटों को एक साथ एक मंच पर लाए और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में एकजुटता दिखाई दे।

सिंगला हिंदू चेहरे हैं और हाईकमान के करीबी के तौर पर देखे जाते हैं। हाईकमान का मानना है कि उनका अनुभव दोनों खेमों के बीच जारी अंदरूनी खींचतान को खत्म कर एकजुटता ला सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली में सीनियर नेताओं की हुई बैठक में इस बात पर सर्वसम्मति पहले ही बन चुकी है कि जब तक वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच खींचतान बंद नहीं होगी, तब तक आम आदमी पार्टी और अन्य विरोधी दलों का मुकाबला करना आसान नहीं होगा। संगठन में ऐसे नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा रही है जो न केवल दोनों वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाकर एकजुटता का संदेश दे, ताकि पार्टी वर्कर मिलकर जीत के लिए काम कर सकें।

इन चेहरों पर टिकी हैं निगाहें

दोनों गुटों के बीच समन्वय बैठाने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय इंदल सिंगला का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। सिंगला एक हिंदू चेहरा हैं और दोनों ही खेमों के साथ उनके बेहतर रिश्ते रहे हैं और उनका अनुभव पार्टी के लिए बेहतर है।

इसके अलावा पूर्व ओलंपियन परगट सिंह, पूर्व अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा केपी सिंह और सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी नेतृत्व ऐसे नेता की तलाश में है जो जाट सिख, दलित और हिंदू समुदायों के बीच भी बेहतर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन स्थापित कर सके।

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एकजुटता ही सबसे बड़ी चुनौती

हाल के दिनों में 'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' जैसे सांगठनिक कार्यक्रमों के दौरान वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच तीखी बयानबाजी और नारेबाजी देखने को मिली थी। भूपेश बघेल और सचिन पायलट के दौरों के बाद भी जब गुटबाजी पूरी तरह शांत नहीं हुई, तब हाईकमान ने नए सिरे से कमान सौंपने का फैसला लिया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान का नया नेतृत्व 2027 के रण से पहले पंजाब कांग्रेस को एकजुट रख पाने में कितना सफल होता है।

गुटबाजी से पहले भी नुकसान उठा चुकी कांग्रेस

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी से पहले भी नुकसान उठाती आई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के समय से भी ऐसा होता आया है। पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और राजिंदर कौर भट्‌ठल के बीच गुटबाजी का दौर चला। फिर 2021 में पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू से तकरार के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।

इतना ही नहीं 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी सीएम चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के कारण पार्टी में खींचतान देखने को मिली थी। जिसके कारण पार्टी जो पहले 77 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी थी, मात्र 18 सीटों पर आकर सिमट गई। 

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