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DAP की कमी से किसानों की चिंता बढ़ी, विधायक राणा इंद्रप्रताप बोले- 5.5 लाख टन मांग, अब तक मिली आधे से भी कम

By Dr. Sumit Singh SheoranEdited By: Anuj Sharma
Published: Wed, 02 Sep 2026 04:30 PM (IST)

राणा इंद्रप्रताप सिंह ने डीएपी की कमी और आर्म्स लाइसेंस व्यवस्था पर पंजाब सरकार को घेरा। उन्होंने पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और लाइसेंस नीति स्पष्ट करने की मांग की।

राणा इंद्र प्रताप सिंह।

राणा इंद्र प्रताप सिंह।

HighLights

  1. आर्म्स लाइसेंस के लिए 3-5 लाख रिश्वत का आरोप।

  2. पंजाब में डीएपी खाद की भारी कमी से किसान चिंतित।

  3. अवैध हथियारों और खाद की कालाबाजारी बढ़ने का खतरा।

डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। सुलतानपुर लोधी से निर्दलीय विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राणा गुरजीत सिंह के बेटे राणा इंद्र प्रताप सिंह ने बुधवार को चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता कर पंजाब सरकार पर आर्म्स लाइसेंस और खाद की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्म्स लाइसेंस जारी करने को लेकर सरकार की ओर से अधिकारियों और जिला प्रशासन को अनौपचारिक निर्देश दिए गए हैं, जिसके कारण लोगों को परेशानी हो रही है।

राणा इंद्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि आर्म्स लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को कथित तौर पर तीन से पांच लाख रुपये तक रिश्वत देने की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस के आवेदन के समय ही करीब 72 हजार रुपये फीस ली जा रही है और आवेदन खारिज होने पर राशि जब्त हो जाती है। उन्होंने इसे लोगों के साथ अन्याय बताया।

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सुरक्षा के लिए आर्म्स लाइसेंस जरूरी

उन्होंने कहा कि पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए आर्म्स लाइसेंस की जरूरत पड़ती है। ग्रामीण और ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गैंगस्टर तथा अन्य आपराधिक तत्वों से खतरा बना रहता है। उनके अनुसार, जिलों में चार से 10 लाइसेंस ही बड़ी मुश्किल से जारी किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को आर्म्स लाइसेंस को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक फीस और कथित रिश्वत के कारण अवैध हथियारों का चलन बढ़ने का खतरा है। राणा इंद्र प्रताप ने दावा किया कि आर्म्स लाइसेंस रखने वाले 99 प्रतिशत लोगों का कोई आपराधिक मामला नहीं होता।

उन्होंने कहा कि सरकार को सुरक्षा के इस मुद्दे पर व्यावहारिक नीति बनानी चाहिए। साथ ही उन्होंने पंजाब में बढ़ते ड्रग्स के खतरे और पुलिस थानों में जरूरत के मुताबिक सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।

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डीएपी की कमी से किसानों की चिंता बढ़ी

राणा इंद्र प्रताप सिंह ने पंजाब में खाद की उपलब्धता को लेकर भी सरकार और केंद्र को घेरा। उन्होंने कहा कि धान के सीजन में करीब दो लाख टन तथा गेहूं और अन्य मौसमी फसलों के लिए करीब 5.5 लाख टन डीएपी की जरूरत होती है, लेकिन अब तक पंजाब को केवल करीब 1.37 लाख टन डीएपी ही मिल पाई है। उन्होंने कहा कि अगले 45 दिनों में जरूरत की 50 प्रतिशत से अधिक खाद की आपूर्ति कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है।

वितरण व्यवस्था में लापरवाही का आरोप

डीएपी की कमी का सीधा असर किसानों की बुवाई पर पड़ सकता है। उन्होंने यूरिया की वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें माफिया सक्रिय हो जाता है और किसानों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि मार्कफेड और इफको की ओर से निर्धारित मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है तथा वितरण व्यवस्था में भी लापरवाही बरती जा रही है।

उनके अनुसार, खाद की कमी के कारण ब्लैक मार्केटिंग को बढ़ावा मिलने की आशंका है। उन्होंने सरकार से खाद की पर्याप्त उपलब्धता और पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

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