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'युद्ध नशे के विरुद्ध' का बड़ा असर! नशा मुक्ति केंद्रों में 164% बढ़े दाखिले, जानिए कैसे बदली तस्वीर

Published: Mon, 07 Sep 2026 03:20 PM (IST)

पंजाब में नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले तेजी से बढ़े हैं। 2025 में संख्या 25,290 पहुंची, जबकि पुनर्वास केंद्रों में 8,574 लोग दाखिल हुए। 2026 में भी बढ़ोतरी जारी है।

सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह।

सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह।

HighLights

  1. सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में 164% दाखिले बढ़े.

  2. पुनर्वास केंद्रों में भी 224% से अधिक वृद्धि दर्ज.

  3. ओओएटी क्लीनिकों में नए मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी.

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के बीच सरकारी नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में दाखिल होने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले 2024 में 9,577 थे, जो 2025 में बढ़कर 25,290 हो गए।

यह एक साल में 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। वर्ष 2026 में भी यह सिलसिला जारी है और जुलाई तक 14 हजार से अधिक लोग सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल हो चुके हैं। दाखिलों में हुई यह वृद्धि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के मार्च 2025 में शुरू होने के बाद सामने आई है।

इसे नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों में उपचार को लेकर बढ़ते भरोसे के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब परिवार नशे की समस्या को छिपाने के बजाय अपने परिजनों को संस्थागत उपचार दिलाने के लिए आगे आ रहे हैं।

पुनर्वास केंद्रों में भी बढ़ी संख्या

सरकारी पुनर्वास केंद्रों में दाखिलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2024 में यहां 2,644 लोग दाखिल हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 8,574 हो गई। यानी एक साल में 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। जुलाई 2026 तक ही 5,800 से अधिक लोग पुनर्वास केंद्रों में दाखिल हो चुके हैं, जो 2025 में दर्ज कुल दाखिलों का करीब 68 प्रतिशत है।

ओओएटी क्लीनिकों में भी बढ़े नए मरीज

नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार के लिए पंजाब में चल रहे आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) क्लीनिकों में भी नए मरीजों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2024 में 13,033 नए पंजीकरण हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 17,702 हो गए। इस वर्ष अगस्त तक 12,500 से अधिक नए मरीज इन क्लीनिकों में पंजीकृत हो चुके हैं।

11 हजार से अधिक लोगों को मिली कानूनी राहत

सरकार ने नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम की धारा 64ए के तहत भी 27 अगस्त 2026 तक 11 हजार से अधिक लोगों को प्रतिरक्षा प्रदान की है। यह प्रावधान नशे की लत से पीड़ित अथवा नशे के सेवन या कब्जे के आरोपित लोगों को उपचार की दिशा में आगे बढ़ने पर कानूनी राहत देता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. बलबीर सिंह ने कहा कि नशा मुक्ति केंद्रों में बढ़ते दाखिले अभियान का उत्साहजनक संकेत हैं। परिवार संस्थागत मदद ले रहे हैं और उपचार व्यवस्था उन लोगों तक पहुंच रही है, जो पहले औपचारिक व्यवस्था से बाहर रह जाते थे।

उन्होंने कहा कि ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ के तीन प्रमुख आधार हैं—नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, प्रभावित लोगों का उपचार एवं पुनर्वास और बच्चों को नशे से बचाने के लिए रोकथाम। सरकार का लक्ष्य नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों को वापस सामान्य जीवन में लाना और परिवारों को फिर से जोड़ना है।