'पंजाब सरकार के पास वीटो पावर नहीं, सभी नियमों का हुआ पालन', हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर ASG ने किया साफ
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अश्वनी शर्मा की नियुक्ति को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बताया है।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर ASG ने किया साफ। फाइल फोटो
HighLights
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने नियुक्ति प्रक्रिया का बचाव किया।
पंजाब सरकार की आपत्तियों को अनावश्यक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन कर नियुक्ति की।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस अश्वनी शर्मा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार की ओर से उठाए गए सवालों पर भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने आपत्ति जताई है।
उन्होंने पंजाब सरकार के रुख को दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक बताते हुए कहा कि नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217 (1) के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की है। इसमें किसी कानून या निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ है।
जैन ने कहा कि हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर (एमओपी) के तहत स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है। जस्टिस अश्वनी शर्मा की नियुक्ति से पहले इस प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने छह अगस्त 2026 को पहले चरण में महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब तथा हरियाणा के चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश की थी।
पंजाब-हरियाणा से 10 अगस्त को मांगी गई थी राय
जैन के अनुसार, एमओपी के तहत पंजाब और हरियाणा सरकारों को प्रस्ताव की जानकारी दी गई थी और 10 अगस्त को दोनों राज्यों से राय मांगी गई थी। दोनों राज्यों के राज्यपालों ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। हरियाणा सरकार ने भी 12 और 13 अगस्त को प्रस्ताव के समर्थन में अपनी राय भेज दी थी। वहीं, पंजाब सरकार ने अभी तक अपनी राय नहीं भेजी है।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के पास अपनी राय देने के लिए पर्याप्त समय था। सामान्य तौर पर एक-दो सप्ताह का समय उचित माना जाता है। हालांकि, राज्य सरकार की राय नियुक्ति के लिए बाध्यकारी नहीं होती। राज्य सरकार से राय लेना प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन उसे किसी प्रस्ताव पर वीटो का अधिकार प्राप्त नहीं है।
किसी को भी न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए किसी प्रस्ताव को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि गैर-राजनीतिक और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामले का राजनीतिकरण किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने पंजाब सरकार से इस मामले को अनावश्यक विवाद का विषय न बनाने की अपील की।
