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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 20, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Farmers Protest में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को मिली सरकारी नौकरी, 25 बने क्लर्क; 5 को सेवादार पद पर तैनाती

Updated: Fri, 20 Sep 2024 06:48 PM (IST)

Punjab News पंजाब सरकार ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन (Farmers Protest) में जान गंवाने वाले 30 किसान परिवारों के वारिसों को नौकरी ...और पढ़ें

कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां नौकरी पाने वाली महिला को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां नौकरी पाने वाली महिला को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए।

HighLights

  1. पंजाब सरकार ने 30 लोगों को दिए सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र
  2. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि अब तक 44974 नौजवानों को मिली नौकरी
  3. तीन कृषि कानूनों के विरोध के दौरान सैकड़ों लोगों नें गंवाई थी जान

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब सरकार ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन में जान गंवाने वाले 30 किसान परिवारों के वारिसों तो नौकरियां दी।

कृषि और किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने इनमें से 25 लोगों को कृषि और किसान कल्याण विभाग में क्लर्क और पांच को सेवादार के रूप में नियुक्ति पत्र सौंपे।

इसके अलावा पशुपालन विभाग में दो वेटरनरी इंस्पेक्टर और चार क्लर्क, जिनमें से तीन को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली है, के अतिरिक्त डेयरी विकास विभाग में दो स्टेनोग्राफरों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं।

अब तक 44974 सरकारी नौकरियां दी गईं

मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा अब तक राज्य के युवाओं को अब तक विभिन्न विभागों में 44,974 सरकारी नौकरियां प्रदान की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह भर्ती पूरी तरह से मेरिट के आधार पर और पारदर्शी तरीके से की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार नौजवानों को नौकरी देने की प्रक्रिया में लगातार आगे बढ़ रही है।

तीन कृषि कानूनों का किया विरोध 

तीन कृषि कानून को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ सैकड़ों किसानों ने प्रदर्शन किया था। किसानों का यह आंदोलन नवंबर 2020 से दिसंबर 2021 तक जारी रहा। इस अवधि के दौरान किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे और तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे।

हालांकि, इस बीच किसानों और केंद्र सरकार के बीच में वार्ता भी हुई, लेकिन उसका कोई भी परिणाम सामने नहीं आया। आखिर में केंद्र सरकार ने तीनों कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया। इस आंदोलन में पंजाब के सैकड़ों किसानों की जान गई थी।

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