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कर्मचारियों के DA बकाए पर पंजाब सरकार को हाई कोर्ट की फटकार, चीफ जस्टिस बोले- 'कर्मचारियों नहीं मिल रहा हक का पैसा'

Published: Mon, 05 Oct 2026 11:09 AM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए बकाए को लेकर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

हाई कोर्ट ने डीए बकाए पर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

हाई कोर्ट ने डीए बकाए पर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने डीए बकाए पर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई

  2. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट अपील के स्टेटस पर कोर्ट को गुमराह किया

  3. चीफ जस्टिस बोले, कर्मचारियों को नहीं मिल रहा उनका हक का पैसा

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के भुगतान के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

हाई कोर्ट ने पूर्व आदेशों का अनुपालन नहीं होने व सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने बारे गुमराह करने पर सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से पंजाब सरकार की अपील का स्टेटस तलब करते हुए मामले की सुनवाई कल तक स्थगित कर दी।

कर्माचारियों को सरकार नहीं दे रही उनके हक का पैसा

कोर्ट ने कहा की सरकार कह रही है उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की हुई और सभी आपत्ति दूर कर ली है जबकि याची के वकील ने कहा कि सरकार जानबूझकर अपील पर लगी आपत्ति हटा नहीं रही है और हाई कोर्ट को गुमराह कर रही है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार करोड़ो रूपये विभिन्न् योजना के तहत बांट रही है लेकिन कर्मचारियों को उनके हक का पैसा नहीं दिया जा रहा।

कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार जानबुझकर अपील को लटकाने का काम कर रही है तो यह गंभीर मामला है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार तक स्थगित करते हुए सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से पंजाब सरकार की अपील का स्टेटस तलब किया।

सरकार निष्पक्षता से करे अधिकारों का इस्तेमाल

सोमवार को हाई कोर्ट के आदेश पर मुख्य सचिव ने पेश होकर पक्ष रखा जिस पर कोर्ट संतुष्ट नजर नहीं आया। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पांच अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था।

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा था कि 3 अगस्त के आदेश के बावजूद मुख्य सचिव की ओर से अनुपालन शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया है। हालांकि, यदि राज्य को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में कोई संरक्षण मिल जाता है तो व्यक्तिगत पेशी से छूट रहेगी।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि पक्षों के बीच किसी तरह का समझौता हो गया है, जबकि उनका उद्देश्य केवल हाई कोर्ट के आदेश को लागू करवाना है।

हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य को अपने फैसले के खिलाफ अपील करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए। कार्यवाही को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

भूगतान के लिए तय हुआ था 2 हफ्ते की समय

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने तीन अगस्त को पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को सभी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए-डीआर की अद्यतन किस्त अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को दिए जा रहे केंद्रीय दर के अनुरूप जारी करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने भुगतान के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की थी। समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी निर्देश था।

साथ ही मुख्य सचिव को अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने को कहा गया था। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य ने एक सितंबर को अपील दायर की थी।

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