हाईकोर्ट के निशाने पर पंजाब सरकार, 500 करोड़ के स्कॉलरशिप घोटाले में FIR न होने पर जताई कड़ी नाराजगी
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 500 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। ...और पढ़ें
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हाईकोर्ट के निशाने पर पंजाब सरकार (फाइल फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले में पंजाब सरकार को फटकारा।
'नो कोअर्सिव स्टेप्स' की गलत व्याख्या पर नाराजगी।
मुख्य सचिव की माफी स्वीकार, कार्रवाई के निर्देश।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब के बहुचर्चित पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि अदालत के “नो कोअर्सिव स्टेप्स” आदेश का अर्थ केवल रिकवरी तक सीमित था, न कि आपराधिक अभियोजन पर रोक।
कोर्ट ने माना कि राज्य सरकार ने 21 दिसंबर 2021 के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या कर चार संस्थानों तथा अन्य आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में गंभीर देरी की।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि 10 नवंबर 2021 के कैबिनेट निर्णय तथा रिकवरी पर रोक संबंधी अंतरिम आदेश को इस रूप में समझा गया कि आपराधिक कार्रवाई भी प्रभावित हो सकती है।
इस पर कोर्ट ने दोटूक कहा कि यह स्पष्टीकरण स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि आदेश स्पष्ट रूप से केवल वसूली संबंधी कठोर कदमों तक सीमित था। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि संज्ञेय अपराध की जानकारी 2020 या उससे पहले उपलब्ध थी तो संविधान पीठ के ‘ललिता कुमारी’ फैसले के अनुसार तत्काल एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी, न कि वर्षों तक प्रारंभिक जांच के नाम पर मामला लंबित रखा जाता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंजाब में प्रारंभिक जांच को लंबा खींचने की प्रवृत्ति पर भी गंभीर चिंता जताई और कहा कि कई मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय वर्षों तक फाइल दबाए रखती है, जो सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत है। मुख्य सचिव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह डीजीपी के साथ बैठक कर नई प्रशासनिक गाइडलाइन जारी करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
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हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव की बिना शर्त माफी तो स्वीकार कर ली, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकार की वास्तविक नीयत अब अगली कार्रवाई से परखी जाएगी। अदालत ने कहा कि राज्य बताए कि शेष चार संस्थानों, संबंधित अधिकारियों और रिपोर्टों में नामित अन्य आरोपितों के खिलाफ क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि किसी अंतरिम आदेश की मनमानी व्याख्या कर आपराधिक कानून को निष्क्रिय नहीं किया जा सकता।
मामले में अब राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। साथ ही हालिया दर्ज एफआईआर की प्रति प्रवर्तन निदेशालय को भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।