पंजाब में 1168 आरोपी तीन साल से फरार, 80 जांच फाइलें गायब; हाई कोर्ट ने पुलिस को लगाई कड़ी फटकार
हाई कोर्ट ने पंजाब में तीन वर्ष से लंबित आपराधिक जांच पर कड़ा रुख अपनाया। अमृतसर ग्रामीण में 1168 आरोपित ...और पढ़ें

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HighLights
हाई कोर्ट ने तीन साल से लंबित मामलों की सूची मांगी।
पंजाब में 1168 आरोपी फरार, 80 जांच फाइलें गायब।
डीजीपी को लंबित जांच की निगरानी का निर्देश दिया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में आपराधिक मामलों की जांच में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति एनएस शेखावत की अदालत ने राज्य के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित आपराधिक मामलों की पूरी सूची दाखिल करने का आदेश दिया है।
अदालत ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भी हर सोमवार सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों के साथ आभासी बैठक कर लंबित जांच की निगरानी करने और उन्हें जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
मामला जसमाल सिंह उर्फ घोघा उर्फ सोनू की याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने इससे पहले 23 जुलाई को पाया था कि अमृतसर ग्रामीण के कंबोज थाने में एक सितंबर 2023 को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दर्ज प्राथमिकी में नामजद आरोपितों को दो वर्ष से अधिक समय तक गिरफ्तार नहीं किया गया।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस सक्रिय हुई और याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अदालत ने अमृतसर ग्रामीण जिले में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित सभी जांच का विस्तृत ब्योरा मांगा।
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565 FIR 3 साल से ज्यादा समय से लंबित
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, अमृतसर ग्रामीण की ओर से दाखिल हलफनामे में सामने आया कि जिले के विभिन्न थानों में 565 प्राथमिकी की जांच तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित है। इन मामलों में 1219 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि 105 आरोपितों को निर्दोष पाया गया है। इसके बावजूद 1168 आरोपित अब भी गिरफ्तार नहीं किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से केवल 48 आरोपितों को भगोड़ा घोषित किया गया है। अदालत ने इस आंकड़े को बेहद गंभीर माना। हाई कोर्ट ने कहा कि संभव है कि इनमें से कुछ आरोपित देश छोड़ चुके हों, लेकिन पिछले तीन वर्षों में उन्हें भगोड़ा घोषित करने या उनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
80 मामलों में जांच फाइलें तक गायब
मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि 80 मामलों में जांच अधिकारियों की फाइलें ही गायब हैं। अदालत ने इस पर भी कड़ी नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच फाइलों का उपलब्ध नहीं होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अदालत ने कहा कि 565 प्राथमिकी की जांच तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित रहना पीड़ादायक है। ऐसी निष्क्रियता का सीधा असर अपराध के पीड़ितों पर पड़ता है और उन्हें न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
सुपरवाइजर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
हाई कोर्ट ने संबंधित थानों के सुपरवाइजर अधिकारियों की भूमिका को भी बेहद लापरवाहीपूर्ण बताया। अदालत के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के दौरान संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भी इन गंभीर तथ्यों का संज्ञान लेने में विफल रहे। अदालत ने माना कि लंबित मामलों की नियमित निगरानी और जांच अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की व्यवस्था प्रभावी रूप से काम करती दिखाई नहीं दे रही।
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अजनाला थाने में 109 वाहन भी बने सवाल
सुनवाई के दौरान अजनाला थाने में करीब 109 जब्त, बरामद या लावारिस वाहनों का मामला भी सामने आया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, वहां तैनात हेड मुंशी कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अभी तक थाने का कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। उनसे पहले तैनात मुंशी ने भी कार्यभार नहीं संभाला था।
इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्वयं माना है कि अजनाला थाने में लंबे समय से इस तरह की लापरवाही जारी है। अदालत ने इसे पुलिस व्यवस्था में गंभीर प्रशासनिक कमी माना।
हाई कोर्ट ने पुलिस तंत्र पर उठाया सवाल
हाई कोर्ट ने हलफनामे में सामने आए तथ्यों पर बेहद कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि अमृतसर ग्रामीण पुलिस जिले में पुलिस तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि वर्ष 2013 से इस पुलिस जिले का उचित पर्यवेक्षण नहीं हुआ।
न्यायालय ने कहा कि लंबित जांच की निगरानी केवल जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी प्रभावी तरीके से नहीं हो रही है। अदालत ने संकेत दिया कि गृह विभाग के अधिकारी भी ऐसी गंभीर चूकों के लिए जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।
तीन साल से लंबित मामलों की सूची मांगी
अब हाई कोर्ट ने पंजाब के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की पूरी सूची दाखिल करने का आदेश दिया है। इसमें जांच में देरी के कारण, आरोपितों की स्थिति, गिरफ्तारी, भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई, संपत्ति कुर्की और गुम हुई जांच फाइलों का पूरा विवरण देना होगा।
पुलिस महानिदेशक को हर सोमवार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ आभासी बैठक करने और लंबित जांच की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है। हाई कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि अगली सुनवाई तक तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित जांच पूरी कर ली जाएंगी और लंबे समय से फरार आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो पाती, उन्हें कानून के अनुसार भगोड़ा घोषित करने और उनकी संपत्ति कुर्क करने तथा आगे न्यायालय की प्रक्रिया के तहत नीलामी की कार्रवाई की जाए।
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