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पंजाब में ड्रोन से होगा संपत्तियों का डिजिटलीकरण, 50 गांवों से पायलट प्रोजेक्ट शुरू; मालिकों को मिलेंगे प्रोपर्टी कार्ड

Published: Mon, 07 Sep 2026 05:17 PM (IST)

पंजाब सरकार शहरी गांवों में संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए ड्रोन सर्वे और जीआइएस तकनीक का उपयोग करेगी।

पंजाब में ड्रोन से होगा संपत्तियों का डिजिटलीकरण। फाइल फोटो

पंजाब में ड्रोन से होगा संपत्तियों का डिजिटलीकरण। फाइल फोटो

HighLights

  1. शहरी गांवों के संपत्ति रिकॉर्ड का होगा डिजिटलीकरण।

  2. ड्रोन सर्वे और जीआइएस तकनीक का होगा उपयोग।

  3. पहले चरण में 50 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब सरकार अब शहरी गांवों में संपत्तियों के पुराने और अस्पष्ट रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप देने की तैयारी में है। इसके लिए हाई रेजोल्यूशन ड्रोन सर्वे और जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में 50 गांवों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य लाल लकीर के भीतर आने वाली संपत्तियों का सटीक, पारदर्शी और जियो रेफरेंस्ड रिकॉर्ड तैयार करना है। इसके बाद पात्र संपत्ति मालिकों को सत्यापित डिजिटल प्रापर्टी कार्ड उपलब्ध करवाए जाएंगे।

परियोजना से शहरी गांवों में संपत्ति की वास्तविक स्थिति और मालिकाना हक से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पंजाब देश का पहला राज्य है, जहां शहरी गांवों में संपत्ति रिकॉर्ड को इतने बड़े स्तर पर डिजिटल बनाने की पहल की जा रही है।

ड्रोन से होगी संपत्तियों की मैपिंग

परियोजना के तहत सबसे पहले हाई रेजोल्यूशन ड्रोन के माध्यम से लाल लकीर के भीतर स्थित प्लाट और अन्य संपत्तियों का सर्वे किया जाएगा। ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों के आधार पर संपत्तियों के जियो-रेफरेंस्ड नक्शे तैयार किए जाएंगे।

इसके बाद यह जानकारी फील्ड स्टाफ को उपलब्ध करवाई जाएगी। फील्ड कर्मचारी मौके पर जाकर संपत्तियों की सीमाओं और उपलब्ध रिकॉर्ड का जमीनी सत्यापन करेंगे। जमीनी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित संपत्ति मालिकों और अन्य हितधारकों से दावे और आपत्तियां मांगी जाएंगी।

प्राप्त आपत्तियों की जांच की जाएगी और यदि किसी रिकॉर्ड या सीमा को लेकर विवाद सामने आता है तो उसका समाधान किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र मालिकों को सत्यापित प्रापर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे।

पुराने रिकॉर्ड और सीमा विवाद होंगे दूर

शहरी गांवों की लाल लकीर के भीतर रहने वाले लोगों की संपत्तियों का स्वामित्व लंबे समय से पारंपरिक और अनौपचारिक रिकॉर्ड पर आधारित रहा है। ऐसी कई संपत्तियां औपचारिक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होती। इसके कारण संपत्ति की सीमाओं, मालिकाना हक और खरीद-बिक्री के दौरान विवाद की स्थिति पैदा होती है।

नई व्यवस्था में संपत्तियों की सीमाएं स्पष्ट होने के साथ मालिकाना विवरण भी प्रमाणित किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि डिजिटल और सत्यापित रिकार्ड से संपत्ति की खरीद-बिक्री के दौरान लोगों का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही अस्पष्ट सीमाओं, ओवरलैपिंग दावों और पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।

शहरी नियोजन से लेकर आपदा प्रबंधन तक होगा इस्तेमाल

परियोजना के तहत संपत्तियों की स्थान संबंधी और लिखित जानकारी वाला एक मानकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। जरूरत के अनुसार इस जियोस्पेशियल डाटा को मौजूदा भूमि, राजस्व, नगर निकाय और अन्य सरकारी रिकॉर्ड के साथ जोड़ा जाएगा।

इससे सरकार को शहरी नियोजन, संपत्ति कर निर्धारण, बुनियादी ढांचे के विकास और विभिन्न सरकारी सेवाओं की योजना बनाने में मदद मिलेगी। आपदा प्रबंधन के दौरान भी डिजिटल नक्शे और संपत्ति संबंधी सटीक जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है।

भविष्य में ई-गवर्नेंस सेवाओं से जुड़ेगा सिस्टम

यह परियोजना पंजाब आबादी देह (रिकार्ड आफ राइट्स) अधिनियम, 2021 और इसके बाद किए गए संशोधनों के आधार पर लागू की जाएगी। जीआइएस आधारित भूमि सूचना प्रणाली को इस तरह विकसित करने की योजना है कि भविष्य में इसमें बदलाव और नए रिकॉर्ड जोड़ना आसान हो।

इसे पंजाब सरकार की आगामी ई-गवर्नेंस पहलों के साथ भी जोड़ा जा सकेगा। इससे नागरिकों को अपनी संपत्ति से जुड़ी सत्यापित जानकारी डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से प्राप्त करने और सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।