पंजाब मतदाता सूची विवाद: केबीएस सिद्धू ने 2002 मैपिंग नियम को बताया गैर-कानूनी, 20 लाख वोटरों के नाम कटने पर सवाल
पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने पंजाब में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान 2002-03 के माता-पिता के रिकॉर्ड से मैपिंग को गैर-कानूनी बताया है।
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केबीएस सिद्धू ने उठाए सॉफ्टवेयर मैपिंग पर सवाल।
HighLights
2002-03 वोटर रिकॉर्ड से मैपिंग का कानूनी आधार नहीं: सिद्धू
पंजाब में 20 लाख से अधिक मतदाता ड्राफ्ट रोल से बाहर किए गए
पूर्व IAS सिद्धू ने मतदाताओं से फॉर्म-6 भरने की अपील की
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने कहा है कि किसी मतदाता के नाम को उसके माता-पिता की 2002-03 की मतदाता सूची में दर्ज नाम से मैप करना कानून में निर्धारित शर्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसी कृत्रिम शर्त को पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिसके कारण मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
सिद्धू ने कहा कि पंजाब में 13 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से 20 लाख से अधिक मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखकर बाहर किया गया है। उन्होंने ऐसे लोगों से नया फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में हैं, लेकिन उन्हें नोटिस दिए गए हैं, उनकी ओर से कोई गलती नहीं है। उनके मुताबिक समस्या उस प्रक्रिया के कारण पैदा हुई है, जिसमें मौजूदा मतदाता की प्रविष्टि को उसके माता-पिता की वर्ष 2002-03 की मतदाता सूची की प्रविष्टि से जोड़कर देखा जा रहा है।
मतदाता बनने के लिए कानून में केवल तीन मुख्य शर्तें
केबीएस सिद्धू ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए मूल रूप से तीन शर्तें हैं। व्यक्ति भारत का नागरिक हो, उसकी आयु 18 वर्ष पूरी हो चुकी हो और वह संबंधित स्थान पर सामान्य रूप से निवास करता हो।
इसके अलावा कानून में कुछ सीमित अयोग्यताएं निर्धारित हैं, जैसे सक्षम न्यायालय द्वारा मानसिक अस्वस्थता घोषित किया जाना या भ्रष्ट आचरण के लिए दोष सिद्धि।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्देश के जरिए इसके अतिरिक्त कोई नई शर्त नहीं जोड़ी जा सकती। सिद्धू के मुताबिक अनुच्छेद 326 में मतदाता के पंजीकरण के लिए ‘एंटाइटल्ड’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
इसलिए मतदाता के पंजीकरण का अधिकार किसी प्राधिकरण की ओर से दी जाने वाली रियायत नहीं है, जिसे किसी सॉफ्टवेयर आधारित मिलान प्रक्रिया के आधार पर वापस लिया जा सके।
12 सितंबर को दावे-आपत्तियों की समय सीमा खत्म
पंजाब में मतदाता सूची के ड्राफ्ट पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 12 सितंबर को समाप्त हो चुकी है। इनका निपटारा आठ अक्टूबर तक जारी रहेगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर को प्रकाशित की जानी है।
सिद्धू ने कहा कि फार्म-6 केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान ही उपलब्ध होने वाला रास्ता नहीं है। भारत का कोई भी 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का नागरिक, जो संबंधित स्थान पर सामान्य रूप से निवास करता है, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तक सामान्य प्रक्रिया के तहत फार्म-6 के जरिए पंजीकरण करा सकता है।
उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से अपील की कि अनुच्छेद 324 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह स्पष्ट किया जाए कि सितंबर की समय सीमा से चूकने वाले पंजाब के मतदाता भी फार्म-6 दाखिल कर सकेंगे और उन्हें केवल अपील की प्रक्रिया तक सीमित नहीं किया जाएगा।
सिद्धू ने कहा कि यदि सक्षम चुनाव प्राधिकरण ने किसी व्यक्ति की नागरिकता पर विचार करके उसके भारतीय नागरिक नहीं होने का स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज किया है तो कानून में उसके लिए अलग प्रक्रिया है।
लेकिन यदि किसी व्यक्ति का नाम केवल सॉफ्टवेयर आधारित मिलान में विफल हुआ है और नागरिकता पर कोई ठोस निष्कर्ष दर्ज नहीं किया गया है, तो माता-पिता के दस्तावेज के अभाव में उसे अपील की जटिल प्रक्रिया में नहीं धकेला जाना चाहिए।
राजनीतिक दलों से मतदाता जोड़ने पर जोर देने की अपील
पंजाब में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित होने का उल्लेख करते हुए सिद्धू ने सभी राजनीतिक दलों से व्यक्तिगत नाम हटाए जाने का विरोध करने के साथ-साथ पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल कराने पर भी ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में शामिल होने वाला हर पात्र नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए लाभ है, चाहे वह भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल को वोट दे।
सिद्धू 1984 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं और पंजाब सरकार में विशेष मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर वैधानिक जिम्मेदारियां निभाई हैं।
अमृतसर के जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में उन्होंने अमृतसर और तरनतारन संसदीय क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाली थी। इसके अलावा वह लगातार तीन लोकसभा चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग के चुनाव पर्यवेक्षक भी रह चुके हैं।
