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पंजाब में 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' बनी हिट, 33 लाख महिलाओं के खाते में सीधे पहुंचे 1149 करोड़

Published: Fri, 24 Jul 2026 05:19 PM (IST)

पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' के तहत 33 लाख महिलाओं के खातों में सीधे 1,149 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना पंजाब में बनी बड़ी सफलता

मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना पंजाब में बनी बड़ी सफलता

HighLights

  1. 33 लाख महिलाओं को 1149 करोड़ रुपये सीधे मिले।

  2. डीबीटी प्रणाली ने पारदर्शिता और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया।

  3. योजना पंजाब की सबसे बड़ी महिला-केंद्रित पहल बनी।

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। भगवंत मान सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ के तहत महिलाओं के बैंक ख़ातों में वित्तीय सहायता सीधे भेजने के निर्णय को राज्यभर की लाभार्थियों से भरपूर सराहना मिली है। महिलाओं का कहना है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली ने पारदर्शिता, सुविधा और आर्थिक सशक्तीकरण को सुनिश्चित किया है, क्योंकि सहायता राशि सीधे उनके ख़ातों में पहुँच रही है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार अब तक इस योजना के तहत डीबीटी प्रणाली के माध्यम से लगभग 33 लाख महिलाओं के बैंक ख़ातों में 1,149 करोड़ सीधे भेज चुकी है। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की पात्र लाभार्थियों को 1,500 की तीन मासिक किस्तों के रूप में कुल 4,500 दिए गए हैं, जबकि अन्य वर्गों की लाभार्थियों को 1,000 की तीन मासिक किस्तों के रूप में कुल 3,000 प्रदान किए गए हैं। ‘मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना’ के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं की रजिस्ट्रेशन के साथ यह योजना पंजाब की सबसे बड़ी महिला-केंद्रित सामाजिक सुरक्षा पहलों में से एक बन गई है।

राज्यभर की महिलाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह राशि बिना किसी बिचौलिये और बिना किसी देरी के सीधे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँची है तथा वे आवश्यकता पड़ने पर यह राशि कभी भी निकाल सकती हैं।

गुरदासपुर की 32 वर्षीय सरबजीत कौर ने कहा कि डीबीटी प्रणाली ने यह सुनिश्चित किया है कि वित्तीय सहायता अपने वास्तविक उद्देश्य के लिए ही उपयोग हो। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पैसा सीधे हमारे बैंक ख़ातों में भेजा है, जिससे मैं बहुत ख़ुश हूँ। अगर यह राशि नकद दी जाती तो शायद इसका सही उपयोग नहीं होता। कैश देंदे ता आदमी लोग पेग-शेग ते ख़र्च कर देंदे हैं, पर ख़ाते विच ता साडा पैसा सेफ़ है (अगर नकद देते तो आदमी लोग इसे दारू-वगैरह पर ख़र्च कर देते, लेकिन ख़ाते में हमारा पैसा सुरक्षित है।) अब पैसा हमारे अपने ख़ाते में है और जब भी ज़रूरत होगी, हम उसे निकाल सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि यह राशि केवल घर की ज़रूरतों और अन्य आवश्यक ख़र्चों पर ही ख़र्च हो।”

हरचोवाल गाँव की 35 वर्षीय गगनदीप कौर ने इस योजना को अपने अनुभव की सबसे पारदर्शी जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा, “मैंने अभी तक यह राशि नहीं निकाली है क्योंकि जब ज़रूरत होगी तभी इसका उपयोग करूँगी। आर्थिक सहायता देने का यह सबसे अच्छा तरीका है। अगर सरकार नकद राशि बाँटती तो लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता। आवेदन करने के पाँच से छह दिनों के भीतर ही पैसा मेरे ख़ाते में आ गया। पूरी प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और बिना किसी परेशानी के है।”

श्री हरगोबिंदपुर की 49 वर्षीय सुमन कुमारी ने कहा कि इस आर्थिक सहायता से उनके परिवार को घरेलू तथा शिक्षा संबंधी महत्त्वपूर्ण ख़र्च पूरे करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, “इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि पैसा सीधे महिलाओं के ख़ातों में आता है। मैंने इस राशि का उपयोग सार्थक कार्यों में किया है। मेरी दोनों बेटियाँ, जो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ मिला है। इसके साथ-साथ हमारे परिवार को मुफ़्त राशन, मुफ़्त बिजली और मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा भी मिल रही है, जिससे काफ़ी राहत मिली है।”

मंडी अहमदगढ़ की हरपाल कौर ने कहा कि इस आर्थिक सहायता ने महिलाओं को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार ख़र्च करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा, “मैंने यह राशि घर की ज़रूरतों पर ख़र्च की है। मेरी दोनों बेटियों को भी यह राशि मिली है और वे इसका उपयोग अपनी ज़रूरतों के अनुसार कर रही हैं। बेटियों की अपनी आवश्यकताएँ होती हैं और यह अच्छी बात है कि सरकार इस समय उनका सहयोग कर रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि डीबीटी के माध्यम से पैसा सीधे हमारे बैंक ख़ातों में आया है, जिसे हम ज़रूरत पड़ने पर कभी भी निकाल सकते हैं। सरकार ने एह पैसा चंगी नीयत नाल दित्ता है, एह चंगी जगह ही ख़र्च करना चाहीदा है (सरकार ने यह पैसा अच्छे इरादे से दिया है, इसलिए इसे अच्छे कामों पर ही ख़र्च करना चाहिए।)”

लाभार्थियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि डीबीटी मॉडल ने न केवल कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी ढंग से पहुँचाना सुनिश्चित किया है, बल्कि महिलाओं को सरकारी वित्तीय सहायता पर सीधा अधिकार देकर उनकी आर्थिक स्वतंत्रता भी मजबूत की है।

इस बीच, पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा, “मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सहायता मिले। कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित नहीं रहेगी।”

डीबीटी प्रणाली का सफल क्रियान्वयन योजना के नोडल बैंकिंग साझेदार एक्सिस बैंक के सहयोग से भी संभव हुआ है, जिसने पूरे पंजाब में बड़े स्तर पर लाभ राशि के हस्तांतरण को सुगम बनाया है।

एक्सिस बैंक के ग्रुप हेड (ब्रांच बैंकिंग, नॉर्थ एवं टैस्क बिज़नेस) रेनॉल्ड डी’सूज़ा ने कहा, “पंजाब सरकार के साथ मिलकर मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना के क्रियान्वयन में भागीदार बनना एक्सिस बैंक के लिए गर्व की बात है। यह पहल राज्य की लाखों महिलाओं के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी।

हम लाभार्थियों तक सहायता राशि का समय पर, पारदर्शी और प्रभावी वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम जब प्रभावी ढंग से और बड़े स्तर पर लागू किए जाते हैं, तो वे आर्थिक सुरक्षा को मज़बूत करने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं।”

लाभार्थियों के बैंक ख़ातों में सीधे राशि भेज कर डीबीटी प्रणाली न केवल समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित कर रही है, बल्कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता तथा परिवार में निर्णय लेने की उनकी क्षमता को भी सशक्त बना रही है।

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