'BJP से गठबंधन को तैयार, बादल परिवार से नहीं', चुनाव से पहले ज्ञानी हरप्रीत सिंह का बड़ा एलान; पंजाब में सियासी हलचल तेज
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भाजपा से गठबंधन की इच्छा जताई है, लेकिन बादल परिवार के नेतृत्व वाले अकाली दल से ...और पढ़ें
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पंजाब चुनाव से पहले ज्ञानी हरप्रीत सिंह का बड़ा एलान। फाइल फोटो
HighLights
ज्ञानी हरप्रीत सिंह भाजपा से गठबंधन को तैयार।
बादल परिवार के नेतृत्व में अकाली दल से इनकार।
2027 पंजाब चुनाव से पहले गठजोड़ की राजनीति तेज।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब की पंथक राजनीति में गठजोड़ को लेकर नई तस्वीर उभरने लगी है। अलग हुए शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन के लिए तैयार है।
हालांकि, यह गठबंधन केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि साझा एजेंडे और स्पष्ट सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक मुद्दों के आधार पर होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बादल परिवार के नेतृत्व में पार्टी के साथ समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि भाजपा के साथ उनकी बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ जाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है और उनकी पार्टी गठबंधन के लिए तैयार है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक समझौते से पहले साझा मुद्दों और एजेंडे पर सहमति जरूरी होगी।
पंथक एकता के लिए अकाली दल से समझौते के संकेत
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के साथ व्यापक पंथक एकता की संभावना को भी खारिज नहीं किया। उनका कहना है कि अगर अकाली दल पंथक हितों और मूल अकाली सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ता है तो साथ आने की संभावना हो सकती है। लेकिन उन्होंने बादल परिवार के नेतृत्व को लेकर अपना रुख सख्त रखा है।
पूर्व कार्यकारी जत्थेदार के तौर पर उनकी भूमिका के कारण उनका यह बयान पंथक राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका गुट लगातार यह दावा करता रहा है कि अकाली राजनीति को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से अलग कर सिख और पंजाब के मुद्दों पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
2027 से पहले गठजोड़ की राजनीति तेज
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न अकाली और पंथक धड़ों के बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाला मुख्य शिरोमणि अकाली दल भी भाजपा के साथ संभावित रिश्तों को लेकर चर्चा में है। ऐसे में ज्ञानी हरप्रीत सिंह का भाजपा के साथ संभावित गठबंधन को लेकर सकारात्मक रुख पंजाब की बहुकोणीय चुनावी राजनीति को नया आयाम दे सकता है।
वहीं, ज्ञानी हरप्रीत सिंह का गुट अकाली दल वारिस पंजाब दे समेत अन्य क्षेत्रीय पंथक समूहों के साथ भी राजनीतिक संभावनाओं पर विचार कर रहा है। हालांकि, भाजपा के साथ गठबंधन का मुद्दा इन समूहों के बीच मतभेद का कारण बन सकता है। आगामी दिनों में इन बातचीत के परिणाम से पंजाब की पंथक राजनीति और 2027 के चुनावी समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना है।
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