पंजाब: संत निरंजन दास को मिला पद्मश्री पुरस्कार, धर्म का प्रचार और मानवता की सेवा के लिए हुए सम्मानित
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में डेरा सचखंड बल्लां के गद्दीनशीन संत निरंजन दास को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया। ...और पढ़ें

पंजाब: संत निरंजन दास को मिला पद्मश्री पुरस्कार (जागरण फोटो)
HighLights
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संत निरंजन दास को पद्मश्री दिया
मानवता के कल्याण और आध्यात्मिक चेतना हेतु सम्मानित किया गया
श्री गुरु रविदास जी की महिमा का सात दशक से प्रचार करते हैं
जागरण संवाददाता, जालंधर। डेरा सचखंड बल्लां के गद्दीनशीन संत निरंजन दास को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पद्मश्री अवॉर्ड सम्मान दिया। समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई गणमान्य शामिल हुए।
आध्यात्मिक चेतना, मानवता के कल्याण को समर्पित आध्यात्मिक गुरु संत निरंजन दास धर्म का प्रचार करने के साथ-साथ मानवता की सेवा के लिए कार्य रहे हैं। संत निरंजन दास पिछले सात दशक से श्री गुरु रविदास जी की महिमा का प्रचार कर रहे हैं।
संत निरंजन दास 52 वर्ष की उम्र में 23 जुलाई 1994 को गद्दीनशीन बने थे। संत निरंजन दास जी से देश-विदेश में बसी संगत आशीर्वाद लेने के लिए डेरा संचखंड बल्लां में पहुंचती है। संत निरंजन दास चेरिटेबल अस्पताल और स्कूल का संचालन कर मानवता की सेवा कर रहे हैं। कठार में 250 बेड का संत सरवन दास चेरिटेबल अस्पताल है, जिसमें कम खर्च पर मरीजों का इलाज होता है। फगवाड़ा में संत सरवन दास मॉडल स्कूल का संचालन किया जा रहा है।