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SP Vs SP: राजस्थान के दो दिग्गज अब पंजाब में आमने-सामने, क्या पूनिया और पायलट बदल पाएंगे 2022 का फ्लॉप इतिहास?

Published: Sun, 06 Sep 2026 09:09 PM (IST)

पंजाब की सियासत में अब राजस्थान के दो दिग्गज नेता, भाजपा के सतीश पूनिया और कांग्रेस के सचिन पायलट, आमने-सामने होंगे।

राजस्थान के दो दिग्गज अब पंजाब में आमने-सामने। फाइल फोटो

राजस्थान के दो दिग्गज अब पंजाब में आमने-सामने। फाइल फोटो


HighLights

  1. सतीश पूनिया भाजपा पंजाब प्रभारी, सचिन पायलट कांग्रेस पंजाब प्रभारी बने।

  2. राजस्थान के दोनों नेता पंजाब की सियासत में आमने-सामने होंगे।

  3. पायलट को कांग्रेस गुटबाजी, पूनिया को नाराज नेताओं को साधना होगा।

रमनजीत सिंह मणकू, चंडीगढ़। पंजाब की सियासत में अब राजस्थान के नेताओं के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। इसका बड़ा कारण दो धुर विरोधी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने प्रदेश प्रभारी के तौर पर राजस्थान के नेताओं पर विश्वास जताया जाना है।

भाजपा ने पंजाब की कमान राजस्थान के वरिष्ठ नेता डा. सतीश पूनिया को सौंपी है, वहीं कांग्रेस ने पंजाब के प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट को जिम्मेदारी दी है। खास बात यह है कि दोनों नेता राजस्थान की राजनीति में अपनी-अपनी पार्टियों की कमान संभाल चुके हैं और एक-दूसरे की राजनीतिक शैली, रणनीति और कमजोरियों से अच्छी तरह परिचित हैं। ऐसे में पंजाब की सियासत में एसपी (सतीश पूनिया) वर्सेज एसपी (सचिन पायलट) प्रतिस्पर्धा आगामी चुनाव में रोचक मानी जा रही है।

वर्ष 2022 के चुनाव के दौरान भी ऐसी ही स्थिति थी। भाजपा की चुनावी कमान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के हाथ थी, जबकि कांग्रेस हरीश चौधरी के लेकिन दोनों ही नेता पंजाब में कोई चमत्कार नहीं कर पाए थे। भाजपा और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि पायलट और पूनिया के पंजाब प्रभारी बनने से क्या नतीजा भी वैसा ही तो नहीं रहता।

सचिन पायलट की भूमिका अहम

भाजपा के प्रभारी डा. सतीश पूनिया के सिर जहां हरियाणा में भाजपा की फिर से सरकार बनवाने का सेहरा सजाया जाता है, जिसमें इनकी रणनीतिक समझ और चुनावी माइक्रोमैनेजमेंट को श्रेय दिया जाता है।

वहीं, सचिन पायलट को भी राजस्थान में अपने सक्रिय नेतृत्व के दम पर 2018 से पहले के दौर में कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से मजबूत करके सत्ता की सीढ़ी चढ़ाने के लिए सराहा जाता रहा है। दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों के इन नेताओं की भूमिका आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों की रणनीति गढ़ने से लेकर उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में भी अहम रहेगी।

राजस्थान में गुटबाजी का खुद शिकार रहे हैं पायलट

राजनीतिक परिवार से संबंध रखते सचिन पायलट युवा उम्र से ही राजनीति में सक्रिय रहे और केंद्रीय मंत्री तक का अनुभव हासिल है। गुटबाजी व जबरदस्त अंदरूनी विरोध का सामना कर रही पंजाब कांग्रेस को एकजुट करने की जिम्मेवारी संभालने वाले सचिन पायलट खुद भी इसी मर्ज का शिकार रहे हैं।

उनके और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच लंबी चली लीडरशिप की खींचतान जगजाहिर है और इससे मिलता-जुलता ही दृश्य पंजाब कांग्रेस में हाल ही के दिनों में देखने को मिलता रहा है। राहुल गांधी व प्रियंका के करीबियों में शुमार सचिन पायलट के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसी गुटबाजी को दूर करना ही रहेगी।

टकसाली नेताओं की नाराजगी दूर करना पूनिया के लिए चुनौती

पंजाब भाजपा के प्रभारी के तौर पर कमान संभालने वाले सतीश पूनिया भी ऐसे ही हालातों से जूझ रहे हैं। पूनिया की नियुक्ति भी ऐसे समय में हुई जब प्रदेश भाजपा के कई जिलों में पुराने व टकसाली नेताओं ने अनदेखी होने का आरोप लगाते हुए इस्तीफों तक का ऐलान किया।

पूनिया अपनी पहली ही फेरी के दौरान ऐसे कई नेताओं के साथ बातचीत करके रिपोर्ट तैयार करके ले गए हैं, जोकि हाईकमान को सौंपी जानी है।