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लिवर बीमारियों को लगातार बढ़ता जा रहा खतरा, 2050 तक 42% तक उछाल का अनुमान

Published: Sat, 18 Apr 2026 03:38 PM (IST)

लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, मेटाबोलिक डिसफंक्शन-असोसिएटेड स्टीएटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) के मामले 2050 तक 42% बढ़कर 1.8 अरब हो ...और पढ़ें

लिवर बीमारियों का बढ़ता खतरा, 2050 तक 42 फीसदी उछाल का अनुमान।

लिवर बीमारियों का बढ़ता खतरा, 2050 तक 42 फीसदी उछाल का अनुमान।

HighLights

  1. लैंसेट रिपोर्ट: 2050 तक लिवर रोग 42% बढ़ेंगे

  2. पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना मजबूत की

  3. खराब जीवनशैली, शराब लिवर रोगों के मुख्य कारण

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। विश्व लिवर दिवस से ठीक पहले आई ‘द लैंसेट’ की रिपोर्ट ने दुनिया भर में लिवर बीमारियों के तेजी से बढ़ते खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-असोसिएटेड स्टीएटोटिक लिवर डिजीज’ (एमएएसएलडी) के मामले 2050 तक तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे में पंजाब सरकार ने भी समय रहते कदम तेज कर दिए हैं और ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत स्क्रीनिंग और इलाज की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लिवर से जुड़ी बीमारियां अब ‘मूक महामारी’ का रूप ले रही हैं। दुनिया में हर तीन में से एक वयस्क इसके दायरे में आ सकता है। रिपोर्ट में अनुमान है कि मरीजों की संख्या 2023 के 1.3 अरब से बढ़कर 2050 तक 1.8 अरब तक पहुंच सकती है, यानी करीब 42 फीसदी की बढ़ोतरी।
पंजाब में स्थिति को लेकर डाक्टर भी सतर्क हैं।

पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पीआईएलबीएस) के डायरेक्टर डा वीरेन्द्र सिंह के मुताबिक, राज्य में हेपेटाइटिस-सी संक्रमण, शराब का बढ़ता सेवन और बदलती खानपान आदतें प्रमुख कारण बन रही हैं। उन्होंने बताया कि फैटी लिवर डिजीज अब शराब और वायरल हेपेटाइटिस के साथ एक बड़ा कारण बनकर उभर रही है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, तली चीजें और ट्रांस-फैट का ज्यादा सेवन भी खतरा बढ़ा रहा है।

चिंता की बात यह भी है कि अब कम उम्र के लोगों में भी लिवर रोग तेजी से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे लाइफस्टाइल में बदलाव और शराब के बढ़ते चलन से जोड़ रहे हैं। इधर, इलाज की पहुंच बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत प्रति परिवार सालाना 10 लाख रुपीस तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया है। इस योजना में सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पताल शामिल हैं, जहां जांच, भर्ती और विशेषज्ञ सेवाएं कवर की जाती हैं। डा वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि इससे मरीजों का जेब खर्च काफी कम हुआ है और समय पर इलाज संभव हो पा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि योजना का उद्देश्य न सिर्फ खर्च कम करना है, बल्कि बीमारी की समय पर पहचान और इलाज सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे शुरुआती स्तर पर मरीजों की पहचान हो सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में लिवर की बीमारी को जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और शराब से दूरी ही सबसे बड़ा बचाव है।