ट्राईसिटी में कैसे चलेगी मेट्रो? संसद में फिर उठा मुद्दा, क्या प्रयास हुए और क्या है अड़चन, जानें सब कुछ
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ट्राईसिटी मेट्रो परियोजना के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। सांसद मनीष तिवारी ने संसद में यह मुद्दा उठाया था ...और पढ़ें

ट्राईसिटी में मेट्रो परियोजना में चंडीगढ़ प्रशासन समेत पंजाब और हरियाणा की नाकामी भी सामने आ रही।
HighLights
सांसद मनीष तिवारी ने संसद में फिर उठाया मुद्दा
परियोजना 17 साल से सिर्फ फाइलों में।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने किया स्पष्ट।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) में मेट्रो रेल परियोजना फिलहाल सिरे चढ़ते नजर नहीं आ रही है। वजह चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को नहीं भेजा है। संसद में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने इस बात को स्पष्ट किया है। उन्होंने सांसद मनीष तिवारी के सवाल पर जवाब दिया।
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने जवाब में कहा कि 28 अप्रैल 2023 से एकीकृत महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) अस्तित्व में होने के बावजूद केंद्र सरकार को न तो चंडीगढ़ प्रशासन, न पंजाब सरकार और न ही हरियाणा सरकार की ओर से बहु-क्षेत्रीय तेज परिवहन प्रणाली (एमआरटीएस) स्थापित करने का कोई प्रस्ताव भेजा गया है।
17 वर्ष पहले फाइलों में चला था प्रोजेक्ट
यह प्रस्ताव चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली और न्यू चंडीगढ़ को मिलाकर बनने वाले मेट्रो परियोजना से संबंधित है। ट्राईसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट 17 वर्ष पहले फाइलों में चला और आज तक प्रशासन की फाइलों तक रुका हुआ है। प्रोजेक्ट को लेकर 130 से अधिक बैठकें और 15 करोड़ के करीब विभिन्न रिपोर्ट पर खर्च के बाद भी इस प्रोजेक्ट के सिरे चढ़ने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।
34 महीनों में रिजल्ट जीरो, यूएमटीए की भूमिका पर उठे सवाल
सांसद मनीष तिवारी ने हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले लगभग 34 महीनों में यूनिफाइड मेट्रोपालिटिन ट्रांसपोर्ट अथारिटी (यूएमटीए) ने आखिर क्या ठोस कदम उठाए हैं, जबकि परियोजना की व्यवहार्यता को लेकर दो विस्तृत रिपोर्ट पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी हैं।
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तिवारी ने कहा कि राइट्स (रेल इंडिया तकनीकी एवं आर्थिक सेवा) द्वारा प्रस्तुत दोनों रिपोर्टों में मेट्रो परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता को रेखांकित किया गया है। इसके बावजूद संबंधित राज्यों और प्रशासन की ओर से केंद्र को प्रस्ताव न भेजा जाना गंभीर विषय है।
शहर में बढ़ता ट्रैफिक दबाव और बढ़ती जरूरत
चंडीगढ़ और आसपास (मोहाली-पंचकूला) शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। मोहाली और पंचकूला से रोजाना लाखों लोग चंडीगढ़ कामकाज के लिए आते-जाते हैं। ऐसे में एक एकीकृत और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि मेट्रो जैसी परियोजना न केवल यातायात जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और ईंधन बचत में भी सहायक होगी। अब गेंद संबंधित प्रशासन और राज्य सरकारों के पाले में है। यदि वे औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजते हैं, तभी परियोजना पर आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
10,500 से बढ़कर 24 हजार करोड़ तक पहुंचा मेट्रो प्रोजेक्ट का बजट
2008-09 में ट्राईसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया। इसके बाद मेट्रो को लेकर चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब और हरियाणा सरकार ने काम करना शुरू किया। 2023-24 में पूर्व प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित और एडवाइजर डाॅ. धर्मपाल ने मेट्रो को लेकर फिर से प्रयास किए।
हरियाणा और पंजाब ने भी बजट और जमीन देने का वादा किया। बीते एक वर्ष से मेट्रो प्रोजेक्ट का प्रस्ताव पूरी तरह से यूटर्न ले चुका है। 10,500 करोड़ का प्रोजेक्ट अब 24 हजार करोड़ तक पहुंच चुका है।
मौजूदा प्रशासक की ओर से प्रोजेक्ट की उपयोगिता को लेकर लगातार सवाल उठाए गए और मामले में मेट्रो चलाने वाले शहरों का सर्वे करने के लिए कमेटी भी गठित की, लेकिन अभी तक कमेटी की रिपोर्ट और सर्वे सिर्फ फाइलों में ही दबे हुए हैं।
ट्राईसिटी में मेट्रो प्रोजेक्ट का लंबा सफर
- मेट्रो प्रोजेक्ट 2008-09 में प्रस्तावित किया गया।
- ट्राईसिटी में मेट्रो दो फेज में 154.5 किलोमीटर ट्रैक प्रस्तावित है।
- फेज-वन में 85.65 किलोमीटर मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ में ट्रैक प्रस्तावित है।
- चंडीगढ़ में हेरिटेज स्टेटस के कारण 16.5 किलोमीटर अंडरग्राउंड ट्रैक बनना है।
- मेट्रो ट्रैक के लिए प्रति किलोमीटर 150 करोड़ और प्रति स्टेशन 200 करोड़ खर्च आएगा।
- राइट्स ने ट्राईसिटी में टू कोच मेट्रो को बेहतर विकल्प एएआर रिपोर्ट में बताया गया है।
- अगले 30 वर्षों में 47 लाख आबादी के लिए मेट्रो की प्लानिंग की गई है।
- 2027 में पहला चरण शुरू करने का प्रस्ताव
- 70 स्टेशन बनाए जाने हैं पहले चरण में
- राइट्स की रिपोर्ट में 2032 में ट्राईसिटी में पहले फेज में मेट्रो का संचालन प्रस्तावित है।