विटामिन बी12 की कमी से रुक सकता बच्चे का दिमागी विकास, PGI के शोध में साबित हुई यह बात, माता- पिता समय पर दें ध्यान
चंडीगढ़ पीजीआई के शोधकर्ताओं ने पाया है कि विटामिन बी12 की कमी बच्चों के दिमागी विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। 141 शिशुओं पर हुए अध्ययन मे ...और पढ़ें

विटामिन बी12 की कमी सीधे तौर पर दिमागी विकास को प्रभावित करती है।
HighLights
पीजीआई के शोधकर्ताओं के अध्ययन में साबित हुई यह बात।
शोध में 141 शिशुओं पर अध्ययन हुआ।
समय पर बी12 सप्लीमेंट से दिमागी नुकसान की भरपाई संभव।
मोहित पांडेय, चंडीगढ़। बच्चे की सुस्ती और विकास में देरी पर माता-पिता का सावधान हो जाना जरूरी है। विटामिन बी12 की कमी से बच्चे का दिमागी विकास रुक सकता है। यह बात चंडीगढ़ पीजीआई के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में साबित हुई है।
अध्ययन में शिशुओं के मस्तिष्क विकास में विटामिन बी12 की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया है। प्रतिष्ठित जर्नल पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस शोध में 141 बी12 की कमी से ग्रस्त शिशुओं का मूल्यांकन किया गया।
एमआरआई और मानकीकृत विकासात्मक परीक्षणों के जरिए यह पाया गया कि विटामिन बी12 की कमी सीधे तौर पर दिमागी विकास को प्रभावित करती है। शोध के अनुसार, प्रभावित शिशुओं में सुस्ती, विकास में देरी, माइलस्टोन का रुकना, एनीमिया और कुछ मामलों में त्वचा का काला पड़ना व बालों का हल्का होना देखा गया।
करीब 60 प्रतिशत बच्चों में मस्तिष्क के आकार में कमी पाई गई। उपचार के बाद बच्चों में सतर्कता और विकास में तेजी से सुधार हुआ, जिससे स्पष्ट है कि समय पर हस्तक्षेप से नुकसान की भरपाई संभव है।
विशेषज्ञों ने चेताया है कि शाकाहारी माताओं और छह माह से अधिक समय तक केवल स्तनपान कराने वाली माताओं में बी12 की कमी का जोखिम अधिक रहता है। एक साधारण बी12 की गोली इस गंभीर समस्या से बचाव कर सकती है।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
- देखने में समस्या महसूस हो सकती है। यानी विजन लॉस हो सकता है।
- मेमोरी लॉस, डिप्रेशन, व्यवहार में बदलाव की समस्या आ सकती है।
- सुन्नपन, झुनझुनी, मांसपेशियों में कमजोरी होने के साथ ही चलने-फिरने में भी दिक्कत।