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फरीदकोट में अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़, 35 से अधिक युवक रेस्क्यू

Updated: Wed, 19 Aug 2026 06:01 AM (IST)

फरीदकोट में एक और अवैध नशा छुड़ाऊ केंद्र का भंडाफोड़ हुआ, जहां से 35 से अधिक युवकों को रेस्क्यू कर सरकारी केंद्र में भर्ती कराया गया।

फरीदकोट में अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़। फोटो जागरण

फरीदकोट में अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़। फोटो जागरण

HighLights

  1. फरीदकोट में अवैध नशा छुड़ाऊ केंद्र का भंडाफोड़, 35 युवक रेस्क्यू।

  2. गुप्त शिकायत पर प्रशासन-पुलिस टीम ने की छापेमारी, संचालक फरार।

  3. अवैध केंद्रों के संचालकों पर कार्रवाई न होने पर उठे सवाल।

जागरण संवाददाता, फरीदकोट। जिले में अवैध रूप से चल रहे नशा छुड़ाऊ केंद्रों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद ऐसे केंद्रों के संचालन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। ताजा मामले में एक और अवैध नशा छुड़ाऊ केंद्र का भंडाफोड़ करते हुए प्रशासन और पुलिस की टीम ने वहां से 35 से अधिक युवकों को रेस्क्यू करवाया है।

इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर जिले में संचालित अवैध नशा छुड़ाऊ केंद्रों की कार्यप्रणाली और इन केंद्रों के संचालकों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

उल्लेखनीय है कि इस केंद्र को लेकर फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नर के पास एक गुप्त शिकायत पहुंची थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीसी ने स्वास्थ्य विभाग और सिविल प्रशासन के अधिकारियों को मामले की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसके बाद पुलिस को साथ लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम जिसमें डा. हरिंदर गांधी, नायब तहसीलदार हर्षवीर गोयल आदि अधिकारी शामिल थे ने सिक्खांवाला रोड स्थित दोनों कोठियों में छापेमारी की। प्रशासनिक टीम के पहुंचने की भनक लगते ही केंद्र का संचालक मौके से फरार हो गया।

जांच के दौरान टीम को दोनों कोठियों के भीतर 35 युवक मिले, जिन्हें नशा छुड़ाने के नाम पर रखा गया था। प्रारंभिक जांच में केंद्र के संचालन को लेकर आवश्यक वैध अनुमति और मेडिकल स्टाफ से संबंधित नियमों का पालन न किए जाने की बात सामने आई है।

प्रशासन की ओर से कई एंबुलेंस की व्यवस्था कर सभी 35 युवकों को फरीदकोट स्थित गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के सरकारी नशा छुड़ाओ केंद्र में पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों की निगरानी में युवकों का उपचार शुरू कर दिया गया है। केंद्र में युवकों को किन परिस्थितियों में रखा गया था और वहां किस प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध थीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

थाना सिटी कोटकपूरा के एसएचओ सुखविंदर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और सिविल प्रशासन की टीम ने पुलिस की मदद से कार्रवाई की है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट पुलिस को मिलने के बाद फरार संचालक तथा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

पकड़े गए केंद्रों के मामले में कार्रवाई शून्य

गौरतलब है कि इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिले में संचालित निजी नशा छुड़ाओ केंद्रों की निगरानी और उनकी वैधता की जांच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि केंद्र किन नियमों के तहत संचालित हो रहा था और युवकों को वहां रखने के लिए कौन जिम्मेदार था।

जानकारी के अनुसार पिछले करीब दो वर्षों के दौरान जिले में लगभग आठ ऐसे नशा छुड़ाऊ केंद्रों का भंडाफोड़ किया जा चुका है, जिन्हें कथित तौर पर नियमों के विपरीत संचालित किया जा रहा था। कई मामलों में केंद्रों के अंदर युवकों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और अत्याचार की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बार-बार अवैध नशा छुड़ाऊ केंद्रों का खुलासा होने के बावजूद इनके संचालकों के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान युवकों को तो केंद्रों से बाहर निकाल लिया जाता है, लेकिन केंद्र चलाने वाले लोगों पर मामला दर्ज करने या कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती। इसके चलते ऐसे संचालकों के हौसले बुलंद होने की आशंका जताई जा रही है।

आरोपितों पर कार्रवाई सुनिश्चित करवाएंगे: डीसी

इस संबंध में जब डीसी राहुल चाबा से बात की गई तो उनका कहना था कि वे इस पूरे मामले की जांच करवा कर आरोपितों पर कार्रवाई करना सुनिश्चित करवाएंगे। जबकि डिप्टी मेडिकल कमिशनर विश्वदीप गोयल का कहना था कि वे सिर्फ रिपोर्ट बना कर देते हैं जबकि कार्रवाई करना प्रशासन का काम होता है।