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    पंजाब में बंदी सिंहों की रिहाई के लिए सरहिंद में रेल रोको आंदोलन, 13 ट्रेनें प्रभावित

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 03:13 PM (IST)

    कौमी इंसाफ मोर्चा के आह्वान पर सरहिंद में बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर तीन घंटे तक रेल रोको धरना दिया गया। इससे 13 ट्रेनें प्रभावित हुईं और हज ...और पढ़ें

    पंजाब में बंदी सिंहों की रिहाई के लिए सरहिंद में रेल रोको आंदोलन (जागरण)

    पंजाब में बंदी सिंहों की रिहाई के लिए सरहिंद में रेल रोको आंदोलन (जागरण)

    HighLights

    1. कौमी इंसाफ मोर्चा ने बंदी सिंहों की रिहाई के लिए धरना दिया।

    2. सरहिंद में तीन घंटे तक रेल मार्ग बाधित रहा, 13 ट्रेनें प्रभावित।

    3. हजारों यात्रियों को भारी परेशानी हुई, कानूनी कार्रवाई संभव।

    नवनीत छिब्बर, फतेहगढ़ साहिब। बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर शनिवार, 4 जुलाई को कौमी इंसाफ मोर्चा के आह्वान पर सिख व किसान जत्थेबंदियों और अकाली धड़ों ने सरहिंद में दिल्ली-अमृतसर-जम्मू रेल मार्ग को तीन घंटे तक बाधित रखा।

    सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले रेल रोको धरने से करीब 13 अप-डाउन ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ। रूट डायवर्ट और ट्रेनें रद्द होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि सरहिंद रेलवे स्टेशन दोपहर में सुनसान नजर आया।

    कौमी इंसाफ मोर्चा ने 4 जुलाई को पंजाब भर में रेल रोकने का एलान किया था। इसी के तहत शनिवार सुबह से ही अकाली धड़ों, सिख व किसान संगठनों के नेता और समर्थक सरहिंद पहुंचने लगे। माधोपुर क्रॉसिंग के पास न्यू सरहिंद स्टेशन पर सुबह 11 बजे धरना शुरू हुआ।

    ये लोग रहे शामिल

    इसमें अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, करनैल सिंह पंजोली, बलजीत सिंह भुट्टा, अमरिंदर सिंह लिबड़ा, हरनेक सिंह भल्लमाजरा, शिंगारा सिंह समेत कई संगठनों के नुमाइंदे शामिल हुए।

    धरने के कारण कटड़ा से दिल्ली जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस को सरहिंद जंक्शन से मोरिंडा-चंडीगढ़ के रास्ते अंबाला की ओर डायवर्ट करना पड़ा। इसके अलावा जनसेवा एक्सप्रेस, आम्रपाली एक्सप्रेस, दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रेस, सरयू-यमुना एक्सप्रेस समेत 10 सवारी गाड़ियों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया।

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    कुछ ट्रेनों को लुधियाना से चंडीगढ़ होते हुए अंबाला की ओर रवाना किया गया। अचानक रूट बदलने और ट्रेनों के घंटों लेट होने से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ सफर कर रहे यात्रियों को स्टेशन पर ही इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों ने वैकल्पिक साधनों से गंतव्य की ओर रुख किया।

    कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था। सभी डीएसपी और एसएचओ पुलिस बल के साथ धरना स्थल पर मौजूद रहे।

    इसके अलावा जीआरपी और आरपीएफ के अधिकारी व जवान भी मौके पर तैनात थे। धरने के दौरान कौमी इंसाफ मोर्चा के नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप था कि सजा पूरी होने के बावजूद दोनों सरकारें बंदी सिंहों की रिहाई में अड़चन डाल रही हैं।

    तीन घंटे तक ट्रेनों का संचालन ठप रहने से सरहिंद, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना और राजपुरा स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई। गर्मी और उमस में यात्रियों को पीने के पानी और बैठने की जगह के लिए भी जूझना पड़ा।

    ई यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेनें छूट गईं, जिससे उनके आगे के कार्यक्रम प्रभावित हुए। दोपहर 2 बजे धरना समाप्त होने के बाद रेल यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ, लेकिन ट्रेनों की समय-सारणी देर शाम तक अस्त-व्यस्त रही।

    रेल रोकने पर हो सकती है सख्त कार्रवाई

    रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 174 के तहत रेल यातायात को बाधित करना दंडनीय अपराध है। इसमें दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर धारा 151 के तहत 5 साल तक की सजा का प्रावधान है।

    इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126 के तहत सार्वजनिक मार्ग को बाधित करने पर एक महीने तक की कैद या 5 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। आरपीएफ और जीआरपी ने संकेत दिए हैं कि रेल यातायात बाधित करने के मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रेल रोको धरने का आह्वान करने वाले प्रमुख लोगों पर कार्रवाई संभव है।