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गुरदासपुर में अलर्ट के बावजूद पुलिसकर्मियों की हत्या, इनपुट के बाद भी क्यों नहीं बढ़ी मुस्तैदी?

Published: Mon, 23 Feb 2026 04:47 PM (IST)

गुरदासपुर के आदियां पुलिस चेक पोस्ट पर दो पुलिसकर्मियों की हत्या से पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। ...और पढ़ें

जीआरपी-आदियां में बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों की जानकारी देते सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (फोटो: जागरण)

जीआरपी-आदियां में बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों की जानकारी देते सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (फोटो: जागरण)

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जागरण संवाददाता, गुरदासपुर। थाना दोरांगला के तहत आते गांव आदियां की पुलिस चेक पोस्ट पर शनिवार देर रात दो पुलिस मुलाजिमों की गोलियां मारकर हत्या होने के बाद पंजाब पुलिस व प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गया है।

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ दिन पहले ही इलाके में किसी बड़ी वारदात को लेकर इनपुट जारी कर दिया था। इसमें बताया गया था कि पांच संदिग्ध किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसके बावजूद पुलिस समय रहते उचित कदम नहीं उठा सकी और दो पुलिस कर्मियों को शहीद होना पड़ा।

उधर, गांव आदियां पहुंचे सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी साफ किया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही किसी बड़ी वारदात का इनपुट जारी कर दिया था। सोमवार को शहीद होमगार्ड जवान अशोक कुमार का उसके पैतृक गांव अखलासपुर में सरकारी सम्मान के साथ कर दिया गया, जबकि एएसआइ गुरनाम सिंह का अंतिम संस्कार मंगलवार को उसकी बेटियों के विदेश से आने के बाद किया जाएगा।

गौरतलब है कि गांव आदियां की पुलिस चेक पोस्ट में दो पुलिसकर्मी रविवार को संदिग्ध हालत में गोली लगने से मृत मिले थे। घटना की सूचना मिलते ही डीआईजी संदीप गोयल, डीआईजी बीएसएफ जेके विरदी और एसएसपी गुरदासपुर आदित्य मौके पर पहुंच गए। मृत पुलिस कर्मियों की पहचान अशोक कुमार निवासी अखलासपुर और गुरनाम सिंह निवासी गादड़ियां के तौर पर हुई थी।

दोनों आदियां पोस्ट पर नाके पर तैनात थे। अशोक कुमार होमगार्ड का जवान था, जबकि गुरनाम सिंह एएसआइ था। हालांकि वारदात शनिवार देर रात हुई थी, लेकिन पुलिस को इसकी जानकारी रविवार सुबह मिली, जब पोस्ट पर तैनात पुलिस मुलाजिमों ने थाने से किया गया फोन नहीं उठाया। एएसआइ के कान व आंख के पास गोली के निशान थे और खून निकल रहा था, जबकि दूसरे के सिर से खून बह रहा था।

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने पुलिस को इनपुट के साथ-साथ पांच संदिग्धों के स्कैच भी दिए थे। रविवार रात को घटनास्थल के पास की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है, जिसमें दो मोटरसाइकिलों पर पांच लोग देखे गए हैं। इससे साफ होता है कि सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट पुख्ता थी, लेकिन पुलिस की लापरवाही के कारण दो मुलाजिमों की जान चली गई।

वहीं सिविल अस्पताल के सूत्रों के अनुसार पोस्टमार्टम के दौरान दोनों पुलिस मुलाजिमों के शरीर से सात गोलियां मिली हैं। एएसआइ गुरनाम सिंह के शरीर से चार, जबकि अशोक कुमार के शरीर से तीन गोलियां मिली हैं। बताया जा रहा है कि चेक पोस्ट के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की तारें कुछ समय पहले गन्ने की ट्राली से उलझने के कारण टूट गई थी, जिसे अभी तक रिपेयर नहीं कराया गया था।

हैरानी की बात यह भी है कि इससे पहले सीमावर्ती क्षेत्र दीनानगर व पठानकोट एयरबेस पर बड़े हमले होने के बावजूद सीमा से मात्र डेढ़ किलोमीटर दूरी पर स्थित पुलिस चौकी में केवल दो जवानों को ही तैनात किया गया था।

उधर, बीएसएफ के सूत्रों के अनुसार भले ही पाकिस्तानी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी ली है, लेकिन पूर्व के हमलों पर गौर करें तो पाकिस्तानी आतंकी कभी भी किसी को पिस्टल से गोली नहीं मारते, वे हमेशा या तो बर्सट मारते हैं या गला रेत कर हत्या कर देते हैं। इसलिए हमलावर पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में हो सकते हैं, लेकिन भारत से ही संबंधित हैं।

उधर, सोमवार को होमगार्ड जवान अशोक कुमार के संस्कार में एडीजीपी नरेश अरोड़ा भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से दोनों शहीदों को एक-एक करोड़ रुपए की सहायता राशि जारी कर दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वह दोनों परिवारों के साथ खड़े हैं।

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