फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, 10 दिन में 7 रुपये की हुई वृद्धि; आम लोगों का बजट बिगड़ा
गुरदासपुर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम आदमी, व्यापारी और किसान परेशान हैं। पिछले दस दिनों में ईंधन की कीमतें करीब सात रुपये प ...और पढ़ें

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ा।
HighLights
पेट्रोल-डीजल के दाम दस दिन में 7 रुपये बढ़े
महंगाई से आम आदमी, व्यापारी, किसान परेशान
सब्जियों, दूध, राशन के दाम भी तेजी से बढ़े
जागरण संवाददाता, गुरदासपुर। लगातार बढ़ रहे पेट्रोल और डीजल के दामों ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। पिछले महज दस दिनों में ईंधन की कीमतों में करीब सात रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जिससे लोग परेशान हैं। केंद्र सरकार की ओर से हर दूसरे- तीसरे दिन कीमतें बढ़ाने का जो सिलसिला चल रहा है, उससे आम उपभोक्ता के साथ-साथ व्यापारियों और किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें गहरा गई हैं।
जिले में दस दिन पहले पेट्रोल 98.33 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, जो आज बढ़कर 105.60 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। वहीं डीजल ने भी 88.13 रुपये से 95.51 रुपये के स्तर को छू लिया है। इस भारी उछाल ने हर उस व्यक्ति की कमर तोड़ दी है, जो दैनिक जरूरतों के लिए सड़क परिवहन पर निर्भर है।
ईंधन के दामों में इस तेजी को देखते हुए सबसे अधिक मार झेल रहे हैं ऑटो, टैक्सी और ट्रक चालक। पेशे से ऑटो चालक रमेश कुमार ने बताया कि पहले जहां 500 रुपये में पूरे दिन का ईंधन निकल जाता था, अब उतने में आधा दिन भी काम चलाना मुश्किल है। बढ़ते दामों के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है, लेकिन आम यात्री पहले से ही परेशान हैं।
ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सबसे गहरा असर रसोई पर पड़ा है। दरअसल, ईंधन की बढ़ती कीमतों ने खाद्य वस्तुओं के दाम को आसमान छूने का रास्ता दे दिया है। सब्जी, दूध, ब्रेड, आटा और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के भावों में भी तेजी आई है। सब्जियों के दाम पिछले सप्ताह की तुलना में 10 से 15 फीसदी बढ़ चुके हैं।
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गृहणियां अब रसोई चलाने के लिए बजट तय तक नहीं कर पा रही हैं। हर दिन कुछ न कुछ महंगा हो रहा है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर सब्जी, राशन और दूध पर पड़ रहा है। आम उपभोग की वस्तुओं के दामों में वृद्धि का कारण ट्रांसपोर्टेशन का महंगा होना बताया जा रहा है।
हालत यह है कि छोटे व्यापारियों और ठेले वालों का रोजगार भी संकट में है। फास्ट फूड बेचने वाले भी अब पहले के मुकाबले कम मुनाफा कमा रहे हैं, क्योंकि तेल और गैस दोनों ही महंगी हो गई है। अधिकांश व्यापारियों ने कहा कि अब वे मोटे तौर पर मुनाफा छोड़कर सिर्फ रोजगार चलाने पर पहुंच गए हैं ताकि किसी तरह से परिवार चलाया जा सके।
लोगों का कहना है कि सरकार को तत्काल कोई न कोई राहत उपाय करना चाहिए, जैसे एक्साइज ड्यूटी में कटौती, वरना हालात और बिगड़ेंगे। इस अचानक हुए ईंधन मूल्य संकट को देखते हुए अब आम उपभोक्ता एक ही सवाल पूछ रहा है कि यह सिलसिला कब तक चलेगा और आखिरकार राहत कब मिलेगी। जब तक केंद्र सरकार इसे लेकर कोई योजनाबंदी नहीं करती, तब तक जनता को आसमान छूते महंगाई के दंश में घर के खर्चे का कायाकल्प करना ही एकमात्र उपाय लग रहा है।