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    पंजाब: लीची उत्पादन पर मौसम की मार, आंधी की वजह से 10 परसेंट तक कच्चा फल गिरा

    Updated: Thu, 07 May 2026 03:44 PM (IST)

    गुरदासपुर में तेज आंधी और प्रतिकूल मौसम के कारण लीची उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है, जिससे इस साल पैदावार में कमी आने की संभावना है। ...और पढ़ें

    लीची उत्पादन पर मौसम की मार, आंधी से दस फीसद कच्चा फल गिरा।

    लीची उत्पादन पर मौसम की मार, आंधी से दस फीसद कच्चा फल गिरा।

    HighLights

    1. तेज आंधी से दस फीसद कच्चा लीची फल गिरा

    2. अनियमित बिजली आपूर्ति और चमगादड़ भी लीची को नुकसान पहुंचा रहे

    3. बागवानों ने सरकार से बागवानी योजनाएं बनाने की मांग की

    जागरण संवाददाता, गुरदासपुर। गर्मियों के लजीज फल लीची का सीजन नजदीक है, लेकिन इस बार फल प्रेमियों को निराशा हाथ लग सकती है। पिछले दिनों आई तेज आंधी और प्रतिकूल मौसम के चलते लीची के उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है। बागवानों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार पैदावार में कमी आने की संभावना है। लीची का फल बाजार में बहुत कम समय के लिए आता है। आमतौर पर जून के पहले या दूसरे सप्ताह में इसकी आमद शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार मौसम की मार लीची के उत्पादन पर भारी पड़ती दिख रही है।

    लीची उत्पादक दिलबाग सिंह लाली चीमा ने बताया कि पिछले दिनों आई तेज आंधी के कारण करीब दस फीसद कच्चा फल पहले ही गिर चुका है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान काफी बड़ा है। अगर आने वाले दिनों में फिर से मौसम खराब होता है तो और भी अधिक नुकसान हो सकता है। ऐसे में इस साल लीची का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा।

    लीची के पेड़ों पर इस समय कच्चे फल लगे हैं, जो अभी पकने की प्रक्रिया में हैं। तेज हवा और वर्षा के कारण ये कच्चे फल समय से पहले ही टूटकर गिर रहे हैं, जिससे उत्पादन में सीधी कमी आ रही है। दिलबाग सिंह ने बिजली की अनियमित आपूर्ति को भी एक बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि बिजली नियमित नहीं मिल रही है, जिससे सिंचाई और अन्य कार्यों में काफी परेशानी हो रही है। बागवानी के लिए बिजली की स्थिर आपूर्ति बेहद जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब फल पक रहे हों और उन्हें अधिक देखभाल की आवश्यकता हो।

    तेज आंधी और बिजली की समस्या के अलावा चमगादड़ों का संकट भी लीची उत्पादकों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। दिलबाग सिंह ने बताया कि इन दिनों चमगादड़ पके हुए फल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। रात के समय चमगादड़ झुंड बनाकर आते हैं और पके फलों को बर्बाद कर देते हैं। इससे उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। कई बार तो पूरे पेड़ के फल एक ही रात में खत्म हो जाते हैं।

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    सरकार बागवानी के लिए विशेष योजनाएं बनाएं: दिलबाग सिंह

    लीची उत्पादक दिलबाग सिंह ने यह भी कहा कि हालांकि लीची का उत्पादन करने में काफी मेहनत लगती है, लेकिन एक बार पौधा लग जाए और वह तैयार हो जाए तो यह किसानों को अच्छा मुनाफा दे सकता है। लीची के बाग को तैयार होने में कई साल लग जाते हैं, लेकिन उसके बाद यह लंबे समय तक अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है।

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    उनका कहना है कि सरकार को बागवानी को बढ़ावा देने के लिए अलग से योजनाएं बनानी चाहिएं। सरकार को चाहिए कि वह बागवानी के लिए विशेष योजनाएं बनाएं ताकि पर्यावरण भी संतुलित रहे और किसान भी लीची जैसे फलों के बाग लगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकें। आज के समय में पर्यावरण संतुलन बेहद जरूरी है और पेड़-पौधे लगाने से न सिर्फ हरियाली बढ़ती है बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है।