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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    चरणजीत सिंह चन्नी की चली जाएगी सांसदी? क्या है गंभीर आरोप; जानिए पूरा मामला

    Updated: Mon, 12 Aug 2024 07:38 PM (GMT+05:30)

    Charanjit Singh Channi पंजाब के जालंधर लोकसभा सीट से चुनाव जीते चरणजीत सिंह चन्नी के निर्वाचन के खिलाफ याचिका दायर की गई है। यह मामला हाईकोर्ट में चल ...और पढ़ें

    Charanjit Singh Channi: चरणजीत सिंह चन्नी पर लगे गंभीर आरोप, क्या चली जाएगी सासंदी?
    Charanjit Singh Channi: चरणजीत सिंह चन्नी पर लगे गंभीर आरोप, क्या चली जाएगी सासंदी?

    HighLights

    1. बिना अनुमति के उन्होंने रोड शो किया।
    2. खर्च का ब्योरा भी नहीं दिया गया।
    3. चन्नी ने भ्रष्ट साधनों का इस्तेमाल किया।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। जालंधर लोकसभा सीट से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी का निर्वाचन जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत रद्द करने की मांग की याचिका पर सुनवाई 30 सितंबर तक स्थगित हो गई है। इस मामले में हाईकोर्ट चन्नी समेत अन्य प्रतिवादी पक्ष को पहले नोटिस जारी कर चुका है।

    कोर्ट ने उन सभी प्रतिवादी को भी नए सिरे से नोटिस जारी किया है जिनको पहले जारी नोटिस सर्व नहीं हुआ। हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए गौरव लूथरा ने हाई कोर्ट को बताया कि जालंधर लोकसभा सीट से चरणजीत सिंह चन्नी सांसद निर्वाचित हुए थे।

    वाहन खर्च का नहीं दिया ब्यौरा

    याची ने बताया कि नामांकन पत्र भरते हुए उन्होंने बहुत सी जानकारियां छुपाई थीं। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव में हुए खर्च का भी सही ब्योरा आयोग को नहीं सौंपा है। चुनाव के दौरान एक होटल में 24 घंटे खाने की व्यवस्था रहती थी, लेकिन इसका खर्च उन्होंने चुनाव प्रचार के ब्योरे में नहीं दिया।

    वह रोजाना 10-15 जन सभाएं करते थे, लेकिन इस दौरान एक भी वाहन का खर्च उन्होंने प्रचार के ब्योरे में नहीं दिया।

    'चन्नी ने भ्रष्ट साधनों का इस्तेमाल किया'

    रामा मंडी में उन्होंने बिना अनुमति के रोड शो किया। यहां तक की पोलिंग बूथ के बाहर वोटर स्लिप बांटने के लिए जो बूथ स्थापित किए गए थे, उनके खर्च का ब्योरा भी नहीं दिया गया। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि चुनाव जीतने के लिए चन्नी ने भ्रष्ट साधनों का इस्तेमाल किया। 

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    इसके लिए जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत उनका निर्वाचन रद्द किया जाना चाहिए। याची ने इस संबंध में चुनाव आयोग को शिकायत भी दी थी लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसे में अब याची को चुनाव याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है।

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