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    जालंधर में ED का छापा, कॉल सेंटर से चल रहा था साइबर फ्रॉड; अमेरिकी नागरिकों से ठगी कर बनाई 187 करोड़ की संपत्ति जब्त

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 08:09 PM (IST)

    ईडी के जालंधर कार्यालय ने साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए ₹187.13 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। यह संपत्ति अवैध कॉल सेंटरों के ...और पढ़ें

    जालंधर में ED का छापा। सांकेतिक फोटो

    जालंधर में ED का छापा। सांकेतिक फोटो

    HighLights

    1. ईडी ने ₹187.13 करोड़ की संपत्ति जब्त की।

    2. यह संपत्ति साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग से बनी थी।

    3. अवैध कॉल सेंटर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे।

    जागरण संवाददाता, जालंधर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने साइबर ठगी और मनी लांड्रिंग नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 187.13 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। ईडी के अनुसार, यह संपत्ति अवैध काल सेंटर के जरिए विदेशी, विशेषकर अमेरिकी नागरिकों के साथ आनलाइन ठगी कर बनाई गई थी। जब्त की गई संपत्तियों में हरियाणा, दिल्ली और गोवा में स्थित फ्लैट, विला, फार्महाउस भी शामिल हैं।

    ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की है। ईडी ने यह कार्रवाई अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआइ द्वारा साझा की गई जानकारी और सीबीआइ की ओर से वर्ष 2023 में दर्ज एफआइआर के आधार पर शुरू हुई थी।

    आरोप है कि साइबर गिरोह ने अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता और सरकारी एजेंसियों के नाम पर झांसा देकर लाखों डालर की ठगी की थी। ईडी की जांच में सामने आया है कि जालंधर में डिजीकम्प्स-द फ्यूचर आफ डिजिटल नाम से अवैध काल सेंटर संचालित किया जा रहा था।

    विदेशी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने का झांसा 

    इसमें करीब 36 कर्मचारी कार्यरत थे, जिनमें जिगर अहमद, यश खुराना, इंदरजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा शामिल थे जो जानी, दक्षय सेठी और गौरव वर्मा की देखरेख में विदेशी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने का झांसा देते थे और उन्हें आइआरएस (इंटरनल रेवेन्यू सर्विस) जैसी एजेंसियों की कार्रवाई का डर दिखाकर गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करते थे।

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    इसके बाद पीड़ितों को धनराशि क्रिप्टोकरेंसी में स्थानांतरित करने के लिए उकसाते थे। ईडी के अनुसार ठगी से प्राप्त रकम पहले क्रिप्टो वालेट में भेजी जाती थी और बाद में शेल कंपनियों के माध्यम से उसे अचल संपत्तियों में निवेश कर वैध बनाने की कोशिश की जाती थी।

    जनवरी व फरवरी में 13 ठिकानों पर की थी छापामारी

    ईडी ने जनवरी और फरवरी 2026 में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के 13 स्थानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान डिजिटल उपकरण, अपराध से जुड़े दस्तावेज और 34 लाख रुपए बरामद किए गए थे। कई ऐसे दस्तावेज भी मिले थे, जिनसे ठगी की रकम को उच्च मूल्य की संपत्तियों में निवेश करने के साक्ष्य मिले थे।

    जांच में जानी उर्फ जानी त्यागी, दक्षय सेठी, राघव, सतीश, निखिल वर्मा, गौरव वर्मा और गौतम डंगरा समेत अन्य आरोपितों की भूमिका सामने आई थी। इन लोगों ने ठगी से अर्जित रकम को हरियाणा, दिल्ली और गोवा में निवेश किया था। इसी आधार पर 187.13 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं।

    ईडी का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।