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    जालंधर IED मामला: नशे, पैसे और विदेश जाने की चाहत... BKI से जुड़ आतंकी बना रणजीत, पूरे नेटवर्क की तलाश में एजेंसी

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 09:57 PM (IST)

    जालंधर आईईडी मामले का मुख्य आरोपी रणजीत सिंह नशे, पैसों और विदेश जाने की चाहत में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) से जुड़कर आतंकी बन गया। ...और पढ़ें

    जालंधर IED मामला: पूरे नेटवर्क की तलाश में एजेंसी। फाइल फोटो

    जालंधर IED मामला: पूरे नेटवर्क की तलाश में एजेंसी। फाइल फोटो


    HighLights

    1. रणजीत सिंह नशे, पैसों के लालच में बीकेआई से जुड़ा।

    2. 50 हजार रुपये और विदेश जाने के वादे पर लाया विस्फोटक।

    3. पुलिस तीन अन्य साथियों की तलाश में, फंडिंग एंगल भी।

    सुक्रांत, जालंधर। पैसों, नशे की लत और विदेश जाने की चाहत में जालंधर में आइईडी बरामदगी मामले की जांच में फरार मुख्य आरोपित रणजीत सिंह बीकेआइ के नेटवर्क में आकर आतंकी बन गया। शुरुआती जांच में पता चला है कि रणजीत ने विदेश भेजने के वादे और 50 हजार रुपये के लालच में विस्फोटक लाने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी।

    इससे भी बड़ा तथ्य यह है कि वह अकेला नहीं था, बल्कि उसके साथ तीन अन्य युवक भी इस पूरी साजिश का हिस्सा बने। इस मामले में पुलिस पहले ही सतबीर सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है।

    जानकारी के मुताबिक, रणजीत लंबे समय से नशे का आदी था। इसी कमजोरी का फायदा पाकिस्तान समर्थित बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआइ) के विदेशी हैंडलरों ने उठाया। पहले उसे आर्थिक मदद और बेहतर भविष्य के सपने दिखाए गए, फिर धीरे-धीरे उसे आतंकी नेटवर्क के संपर्क में लाया गया।

    भरोसा बनने के बाद बड़े मिशन में किया जाता था शामिल

    अधिकारियों का मानना है कि ऐसे युवकों को पहले छोटे-छोटे काम सौंपे जाते हैं और भरोसा बनने के बाद उन्हें बड़े मिशन में शामिल किया जाता है। जांच में सामने आया कि उसने अपने रिश्तेदार सतबीर सिंह सहित अन्य युवकों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने में भूमिका निभाई।

    आइईडी को पंजाब तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसने अपने साथियों के साथ मिलकर निभाई थी। अब पुलिस अन्य तीन युवकों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस रणजीत के मोबाइल फोन, काल डिटेल रिकार्ड, इंटरनेट मीडिया अकाउंट, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही हैं।

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    यह भी खंगाला जा रहा है कि वह किन लोगों के लगातार संपर्क में था और किन माध्यमों से उसे निर्देश मिलते थे। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या उसे या उसके साथियों को किसी अन्य मिशन के लिए भी तैयार किया जा रहा था। जांच में पहले ही फंडिंग का एंगल सामने आ चुका है। पुलिस को आशंका है कि विदेशी हैंडलरों ने पंजाब में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए रणजीत के माध्यम से लाखों रुपये भेजे होंगे। 

    रणजीत के गांव वाले हैरान

    रणजीत के गांव ढंडोर, पतारा में भी इस मामले के सामने आने के बाद हैरानी है। गांव वालों का कहना है कि उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि उनके बीच रहने वाला कोई युवक आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। हालांकि कई लोगों ने यह जरूर स्वीकार किया कि रणजीत लंबे समय से नशे का आदी था और गलत संगत में रहता था।