पंजाब बंद का जालंधर में दिखा असर, कई जगह सड़कें की गई जाम; हाईवे पर रोके गए ट्रक
पंजाब बंद का जालंधर में असर दिखा। कई सड़कें और हाईवे जाम रहे। अस्पताल, एंबुलेंस और दवा की दुकानें खुली रहेंगी। स्कूलों को लेकर स्थानीय स्तर पर स्थिति अलग है।

जालंधर में धरने पर बैठे विभिन्न संगठनों के सदस्य।
जागरण संवाददाता, जालंधर। बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से बुलाए गए पंजाब बंद का जालंधर में व्यापक असर देखने को मिला। शहर में कई स्थानों पर सड़कों को जाम किया गया, जिससे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। सुबह से ही प्रमुख मार्गों पर यातायात की रफ्तार थमी रही।
रामामंडी चौक पर सिख इंसाफ मोर्चा के सदस्यों ने धरना दिया। इसके कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात बाधित हो गया। रास्ता बंद होने के बाद हाईवे पर खड़े ट्रक चालकों ने अपने वाहनों के आगे दूसरे वाहन भी खड़े कर दिए, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो गई।
गुरु नानक मिशन चौक पर भी कौमी इंसाफ मोर्चा के सदस्यों ने यातायात रोक दिया। जालंधर कैंट के पास भी रास्ते बंद किए गए हैं। जालंधर बस अड्डा पहले से ही बंद पड़ा है। निजी स्कूलों में छुट्टी रही, जबकि सरकारी स्कूलों में कुछ विद्यार्थी ही पहुंचते दिखाई दिए।
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अस्पताल, दवा की दुकानें खुली रहेंगी
बंद के दौरान अस्पताल, एंबुलेंस, दवा की दुकानें और अन्य जरूरी आपात सेवाओं को छूट दी गई है। मरीजों, बुजुर्गों और जरूरी काम से जाने वाले लोगों को राहत देने की व्यवस्था रहेगी। आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को रास्ता देने के निर्देश हैं।
स्कूल-कालेजों को लेकर पूरे पंजाब में एक समान बंद का आदेश होने की पुष्टि नहीं है। ऐसे में अभिभावकों और विद्यार्थियों को अपने जिले के प्रशासन या संबंधित शिक्षण संस्थान से जानकारी लेने के बाद ही घर से निकलने की सलाह दी गई है।
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क्यों बुलाया गया बंद
कौमी इंसाफ मोर्चा जेलों में बंद बंदी सिंहों की रिहाई की मांग कर रहा है। इसके अलावा जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने और 15 अगस्त को चंडीगढ़ में प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई जा रही है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में तनाव के बाद 21 अगस्त को बंद का आह्वान किया गया।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी समेत कुछ संगठनों ने बंद का समर्थन किया है। वहीं पंजाब गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष कीमती भगत ने बंद का विरोध किया है। उनका कहना है कि वह जगतार सिंह हवारा की पैरोल के विरोध में नहीं हैं, लेकिन बंद से श्रद्धालुओं और आम लोगों को परेशानी हो सकती है।
