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    दादी की मौत के बाद कैंसर विशेषज्ञ बनने का संकल्प, भाई के हौसले से रचा इतिहास; NEET-UG 2026 के टॉपर बने आर्यन गुप्ता

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 09:36 PM (GMT+05:30)

    लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने री-नीट यूजी में 715 अंक प्राप्त कर देशभर में पहली रैंक हासिल की है, जबकि दिवित जैन और रिशित सिंगला ने भी टॉप-100 में जगह ब ...और पढ़ें

    NEET-UG 2026 के टॉपर बने आर्यन गुप्ता। फोटो जागरण

    NEET-UG 2026 के टॉपर बने आर्यन गुप्ता। फोटो जागरण

    HighLights

    1. आर्यन गुप्ता ने री-नीट यूजी में 715 अंक पाकर AIR 1 हासिल की।

    2. लुधियाना के दिवित जैन और रिशित सिंगला भी टॉप-100 में शामिल।

    3. सिमरन रानी ने 715 अंक के बावजूद मेरिट सूची से नाम गायब होने का आरोप लगाया।

    जागरण संवाददाता, लुधियाना। री-नीट यूजी के घोषित परिणाम में लुधियाना ने देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। शहर के आर्यन गुप्ता ने 720 में से 715 अंक हासिल कर आल इंडिया पहली रैंक प्राप्त की है। वहीं दिवित जैन 695 अंकों के साथ 79वें और रिशित सिंगला 690 अंकों के साथ 100वें स्थान पर रहे। इस तरह री-नीट के टाप-100 में लुधियाना के तीन छात्रों ने जगह बनाई है।

    दुगरी निवासी आर्यन की सफलता के पीछे केवल कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संकल्प भी है। तीसरी कक्षा में पढ़ाई के दौरान उनकी दादी का कैंसर से निधन हो गया था। उसी घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और तभी उन्होंने तय कर लिया कि वह भविष्य में कैंसर विशेषज्ञ (आन्कोलाजिस्ट) बनेंगे, ताकि ऐसे मरीजों की जिंदगी बचा सकें।

    आर्यन बताते हैं कि पेपर लीक के बाद री-नीट की घोषणा से वह मानसिक रूप से टूट गए थे। एक बार रोए भी, लेकिन जल्द ही खुद को संभाला और पहले जैसी पढ़ाई की रूटीन शुरू कर दी।

    इस दौरान उनके बड़े भाई, जिन्होंने 2025 में नीट में आल इंडिया 54वीं रैंक हासिल की थी और फिलहाल दिल्ली में एमबीबीएस कर रहे हैं, ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। पढ़ाई की रणनीति, नोट्स और समय प्रबंधन में भी उन्होंने पूरा मार्गदर्शन दिया।

    पहली परीक्षा में पांच प्रश्न हुए थे गलत

    आर्यन ने बताया कि नीट परीक्षा के पहले पेपर में उसके पांच प्रश्न गलत हुए थे। री-नीट के बाद एक प्रश्न गलत हुआ। खैर उसे पहले से अच्छा परफार्म करने का मौका मिला। आर्यन के पिता डा. सचिन गुप्ता एनेस्थिसिया डाक्टर और मां रीनू गुप्ता गायनेकोलाजिस्ट हैं।

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    पिछले दो सालों से आर्यन दुगरी के एजूकेशन स्केयर से कोचिंग ले रहा था और कोचिंग को मिलाकर दिन में 16-17 घंटे पढ़ता। बारहवीं तक की पढ़ाई आर्यन ने सराभा नगर के सेक्रेड हार्ट स्कूल से मेडिकल स्ट्रीम में 97.2 प्रतिशत अंक लेकर की है। आर्यन टेबल टेनिस खेलने का शौकीन है और राज्य स्तर पर टेबल टेनिस खेल चुका है।

    दो दिन का ब्रेक फिर री-नीट की तैयारी को जुटा

    सिविल लाइंस निवासी दिवित जैन ने 695 अंक लेकर आल इंडिया 79वाीं रैंक हासिल की। दिवित के मुताबिक नीट की जब पहले परीक्षा दी थी तो वह बहुत ही अच्छी हुई थी। यहां तक कि 715 अंक बने थे। जब पेपर लीक होने के बाद री-नीट का सुना तो तनाव बढ़ गया। दो दिन के ब्रेक के बाद दोबारा परीक्षा के लिए यह सोच तैयारी शुरू कर कि मेरे जैसे अन्य विद्यार्थी भी हैं।

    बैडमिंटन, जिम और संगीत सुनने जैसी गतिविधियां जारी रखीं। जिससे मानसिक संतुलन बना रहा। वह रोजाना 12 से 13 घंटे तक पढ़ता। दिवित ने दसवीं तक की पढ़ाई केवीएम स्कूल और बारहवीं एमजीएम स्कूल से मेडिकल स्ट्रीम में 90 प्रतिशत अंक लेकर की है।

    दिवित के पिता डा. कुनाल जैन ओंकोलाजिस्ट और मां डा. कनुप्रिया जैन गायनेकोलाजिस्ट हैं। दिवित का संदेश है कि परीक्षा में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन मेहनत और धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए।

    नौ से दस घंटे तक की है पढ़ाई

    रिशि नगर निवासी रिशित सिंगला ने 690 अंक लेते हुए आल इंडिया 100वां रैंक पाया है। उन्होंने आकाश इंस्टीट्यूट से कोचिंग ली है। नीट की पहले हुई परीक्षा में उसने 715 अंक लिए थे, लेकिन री-नीट होने से वह परेशान हुआ। टेबल टेनिस खेलने, शतरंज और फिल्में देखकर तनाव कम करता रहा।

    कोचिंग के अलावा नीट परीक्षा के लिए नौ से दस घंटे तक पढ़ाई की है। रिलेक्स होने के लिए रिशित ने अपने सभी शौक को बरकरार रखा है। जीएनपीएस स्कूल से 12वीं 98.4 प्रतिशत अंक लेकर की है।

    रिशित के पिता डा. मनीकांत सिंगला एंडोक्रिनोलाजिस्ट और मां मोनिका सिंगला गायनेकोलाजिस्ट हैं। रिशित भी पिता की तरह एंडोक्रिनोलाजिस्ट बनना चाहता है।

    सिमरन ने मेरिट सूची से नाम गायब होने पर उठाए सवाल

    एक दिन पहले घोषित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में एक नया विवाद सामने आ गया है। समराला के गांव नड़ेले (सिहाला) निवासी छात्रा सिमरन रानी का दावा है कि उसने 720 में से 715 अंक हासिल कर आल इंडिया में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। परिवार का आरोप है कि आधिकारिक वेबसाइट पर परिणाम में 715 अंक दिखाई देने के बावजूद बोर्ड द्वारा जारी मुख्य मेरिट सूची में सिमरन का नाम शामिल नहीं किया गया।

    एक ओर जहां परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा, वहीं इंटरनेट मीडिया पर यह खबर तेजी से वायरल होने लगी है। कुछ ही घंटों बाद जब बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक मेरिट सूची देखी तो उसमें सिमरन का नाम नहीं मिला। इसके बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।

    परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार आधिकारिक वेबसाइट पर लाग इन कर परिणाम देखा और हर बार 715 अंक ही प्रदर्शित होते रहे, लेकिन मुख्य मेरिट सूची में नाम गायब होने से वे पूरी तरह स्तब्ध रह गए। यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही हो सकती है। सिमरन रानी ने बताया कि उसने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए दिन-रात परिश्रम किया।

    वह प्रतिदिन लगभग छह घंटे आनलाइन कक्षाएं लेने के बाद 12 से 13 घंटे तक स्वयं अध्ययन करती थी। पिछली परीक्षा स्थगित होने से मानसिक रूप से परेशान हुई थी, क्योंकि उस समय उसके लगभग 710 अंक बन रहे थे। री-नीट परीक्षा की घोषणा के बाद उसने दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी की।

    परिवार ने परीक्षा बोर्ड से मांग की कि यदि परिणाम में कोई त्रुटि है तो छात्रा की उत्तर पुस्तिका और उत्तर कुंजी परिवार को दी जाए। यदि गलती छात्रा की होगी तो वे उसे स्वीकार करेंगे, लेकिन यदि त्रुटि बोर्ड की है तो उसकी सजा उनकी बेटी को नहीं मिलनी चाहिए।

    सिमरन को उसके अंकों के अनुरूप उचित स्थान नहीं दिया गया तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह केवल उनकी बेटी का मामला नहीं बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों का प्रश्न है जो पूरी ईमानदारी और मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं तथा परीक्षा प्रणाली पर विश्वास रखते हैं।