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    'सुरक्षा मिले तो कंपनी चलाने को तैयार...', हाई कोर्ट में बोला कारकस प्लांट चलाने वाला ठेकेदार 

    Updated: Thu, 30 Apr 2026 02:25 PM (GMT+05:30)

    लुधियाना के रसूलपुर में पांच साल से बंद पड़े कारकस यूटिलाइजेशन प्लांट को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। प्लांट संचालित करने वाली कंप ...और पढ़ें

    हाई कोर्ट में ठेकेदार बोला- कारकस प्लांट चलाने को तैयार, बस सुरक्षा की गारंटी चाहिए।

    हाई कोर्ट में ठेकेदार बोला- कारकस प्लांट चलाने को तैयार, बस सुरक्षा की गारंटी चाहिए।

    HighLights

    1. पांच साल से बंद लुधियाना कारकस प्लांट पर सुनवाई

    2. कंपनी ने सुरक्षा मिलने पर प्लांट चलाने की बात कही

    3. स्थानीय विरोध के कारण 2021 से बंद पड़ा है प्लांट

    जागरण संवाददाता, लुधियाना। पांच साल से बंद पड़े कारकस यूटिलाइजेशन प्लांट को लेकर बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान प्लांट संचालित करने वाली कंपनी ने अदालत में साफ कहा कि वह प्लांट को दोबारा शुरू करने में पूरी तरह सक्षम है, लेकिन इसके लिए सरकार को प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

    हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 मई निर्धारित की है। इससे पहले नगर निगम और जिला प्रशासन भी अदालत में अपना पक्ष रख चुके हैं। दरअसल, नगर निगम ने 2017 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत गांव रसूलपुर में कारकस यूटिलाइजेशन प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई थी।

    इसके लिए निगम ने पहले ही पांच एकड़ जमीन खरीद रखी थी। प्रोजेक्ट को डिजाइन, बिल्ट, आपरेट, मेंटेन एंड ट्रांसफर माडल पर विकसित किया गया, जिस पर करीब 8.58 करोड़ रुपये खर्च हुए।

    2019 में शुरू हुआ निर्माण, 2021 में तैयार हुआ प्लांट

    दिसंबर 2019 में प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हुआ। शुरुआत से ही स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। जून 2021 में प्लांट पूरी तरह तैयार हो गया और कंपनी ने सफल ट्रायल रन भी किया। हालांकि, 13 जुलाई 2021 को उद्घाटन के दौरान गांववासी विरोध में उतर आए, जिसके चलते प्लांट चालू नहीं हो सका। बाद में दोबारा प्लांट शुरू करने की कोशिश हुई, लेकिन उस समय के सांसद रवनीत बिट्टू भी विरोध में पहुंच गए और प्लांट पर ताला जड़ दिया गया। तब से प्लांट करीब पांच वर्षों से बंद पड़ा है।

    इस मुद्दे पर हाईकोर्ट और एनजीटी में लगातार सुनवाई चल रही है। नगर निगम अधिकारियों ने कई बार प्लांट को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात कही, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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