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दीपावली पर मोगा में मिलावटखोरों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, सिंथेटिक खोया और पनीर पर विशेष नजर

Published: Mon, 02 Nov 2026 03:53 PM (IST)

दीपावली के त्योहारी सीजन में मोगा स्वास्थ्य विभाग ने खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए निगरानी तेज कर दी ...और पढ़ें

दीपावली पर मिलावटखोरों पर शिकंजा, सिंथेटिक खोया और मिलावटी पनीर पर विशेष निगरानी।

दीपावली पर मिलावटखोरों पर शिकंजा, सिंथेटिक खोया और मिलावटी पनीर पर विशेष निगरानी।

HighLights

  1. मोगा में दीपावली पर खाद्य पदार्थों की जांच तेज।

  2. सिंथेटिक खोया, मिलावटी पनीर पर विभाग की विशेष नजर।

  3. 342 में से 112 सैंपल मिलावटी पाए गए।

राजकुमार राजू, मोगा। दीपावली के त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी तेज कर दी है।

लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से फूड सेफ्टी विंग की टीमें लगातार मिठाई की दुकानों, हलवाई की दुकानों और मिठाइयां तैयार करने वाली निर्माण इकाइयों की जांच कर रही हैं। खासतौर पर बाहर से आने वाले सिंथेटिक खोया, मिलावटी पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों पर विभाग की विशेष नजर है।

फूड सेफ्टी विंग की टीमों ने मोगा समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मिठाई की दुकानों और खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली इकाइयों का निरीक्षण किया। इस दौरान संदिग्ध मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। विभाग का कहना है कि लैब रिपोर्ट में मिलावट या खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने की पुष्टि होने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मांग बढ़ते ही सक्रिय होते हैं मिलावटखोर

फूड इंस्पेक्टर योगेश गोयल ने बताया कि दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर मिठाइयों की खपत सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। इस दौरान अधिक मुनाफा कमाने के लालच में कुछ दुकानदार सस्ते और घटिया कच्चे माल का इस्तेमाल कर सकते हैं। विशेष रूप से सिंथेटिक खोया और मिलावटी पनीर बाहर से मंगवाकर मिठाइयां तैयार किए जाने की आशंका रहती है। ऐसे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करना जरूरी है, ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो।

उन्होंने बताया कि विभाग की टीमें मिठाई तैयार करने वाले स्थानों पर इस्तेमाल होने वाले दूध, खोया, पनीर, देसी घी और खाद्य रंगों की भी जांच कर रही हैं। इसके अलावा खाद्य सामग्री के रखरखाव, निर्माण स्थल की साफ-सफाई और कारीगरों की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

गंदगी और बासी तेल के इस्तेमाल पर भी कार्रवाई

जांच के दौरान कुछ दुकानों और निर्माण इकाइयों में साफ-सफाई की कमी पाई गई। कहीं मिठाइयां खुले में रखी मिलीं तो कहीं तलने के लिए पुराने और इस्तेमाल किए हुए तेल का प्रयोग किया जा रहा था। कुछ स्थानों पर मिठाई बनाने वाले कारीगरों के पास अनिवार्य मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र भी नहीं मिले। विभाग की टीमों ने दुकानदारों को स्वच्छता बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए। लापरवाही मिलने पर सुधार नोटिस भी जारी किए गए।

342 सैंपलों में से 112 में मिली खामियां

विभागीय आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 27 अक्टूबर 2026 तक जिले में खाद्य पदार्थों के कुल 342 सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 290 सैंपलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इनमें 112 सैंपल घटिया, असुरक्षित या गलत लेबल वाले पाए गए हैं। दूध, पनीर, खोया और मसालों के नमूनों में सबसे अधिक गड़बड़ियां सामने आई हैं। पिछले वर्ष दीपावली के दौरान लिए गए 48 सैंपलों में से 18 फेल पाए गए थे। कुछ नमूनों में स्टार्च,  गैर-खाद्य रंगों की मिलावट भी सामने आई थी।

लोग भी बरतें सावधानी

फूड इंस्पेक्टर योगेश गोयल ने लोगों से अपील की कि दीपावली पर मिठाइयां खरीदते समय विशेष सावधानी बरतें। खुले में रखी मिठाइयां, असामान्य रंग वाली खाद्य सामग्री और संदिग्ध गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पाद खरीदने से बचें। हमेशा विश्वसनीय दुकानों से मिठाइयां खरीदें और बिल जरूर लें। किसी दुकान पर मिलावट या अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य सामग्री तैयार किए जाने की जानकारी मिले तो विभाग को सूचित करें। उन्होंने कहा कि त्योहार की खुशियों के बीच स्वास्थ्य से समझौता नहीं होना चाहिए।

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