Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मोगा में पनबस-PRTC कर्मचारियों की हड़ताल, 70 से ज्यादा सरकारी बसें बंद; यात्री बेहाल

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 12:03 PM (IST)

    मोगा में पनबस और पीआरटीसी के अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण 70 से अधिक सरकारी बसें बंद रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा ...और पढ़ें

    सरकारी बसों का चक्का जाम (फोटो: जागरण)

    सरकारी बसों का चक्का जाम (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. मोगा में पनबस-पीआरटीसी की 70 से अधिक बसें बंद।

    2. 200 कर्मचारी हड़ताल पर, यात्रियों को भारी परेशानी हुई।

    3. हड़ताल दो दिन और चलेगी, निजी बसों की चांदी।

    जागरण संवाददाता, मोगा। रोडवेज के अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मोगा से जाने वाली पनबस और पीआरटीसी की 70 से अधिक बसें सोमवार को बंद रही। यात्रियों को निजी बसों का रुख करना पड़ा। हड़ताल के चलते निजी बस संचालकों ने खूब कमाई की।

    पनबस और पीआरटीसी में मोगा में 200 कर्मचारी काम करते हैं और वह सभी हड़ताल पर रहे। दोपहर को कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि रोडवेज के मोगा डिपो को ही लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। हड़ताल अभी दो दिन और चलनी है।

    मोगा में सुबह से ही जब रोडवेज बसें नहीं चली तो लोगों की परेशानी बढ़ गई। निजी बसें अपनी क्षमता से अधिक सवारियां लेकर जाती हुई नजर आई। सुबह अप डाउन करने वाले लोग, विद्यार्थी सरकारी बसों का ही इंतजार करते रहते हैं। सामान्यतः सरकारी बस कम स्टापेज पर रुकती है और यह समय से पहले पहुंचा देती है।

    छात्राओं का नहीं लगता किराया

    छात्राओं का किराया नहीं लगने की वजह से उनके लिए कालेज जाने के लिए इससे बेहतर साधन नहीं हो सकता। लेकिन दूसरे डिपो की आने वाली इक्का-दुक्का बसें ही बस स्टैंड पर नजर आई। इसके अलावा सारी भीड़ को निजी बसों से ही सफर करना पड़ा। शाम तक बस स्टैंड पर निजी बसों में यात्रियों का जमावड़ा लगा रहा।

    खबरें और भी

    सामान्य महिलाओं के लिए रोडवेज की बसों से बेहतर साधन नहीं होता है मात्र आधार कार्ड दिखाने पर सरकार की ओर से उनको निश्शुल्क यात्रा की सुविधा दी गई है लेकिन सोमवार को ऐसा नहीं हुआ महिलाएं बहुत परेशान नजर आई। मोगा निवासी विमला कुमारी का कहना था कि इन कर्मचारियों की आए दिन हड़ताल हो जाती है।

    उधर, कस्तूरी का कहना था कि उसने अपने बेटे से मिलने के लिए फरीदकोट जाना था। सरकारी बसों की हड़ताल के चलते उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। इन महिलाओं का कहना था कि निजी बसों में पूरा किराया देने के बाद भी बैठने के लिए सीट तक नहीं मिल रही है। बस स्टैंड पर बच्चे और बुजुर्गों को भी खासी परेशानी उठानी पड़ी।

    कर्मचारियों ने प्रेश सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

    रोडवेज के कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना था कि सरकार ने उनसे दो-तीन बार बात करने के बाद कई मुद्दों पर सहमति जता दी थी।

    इसके बावजूद आदेश जारी नहीं किए जा रहे। कर्मचारियों का कहना था कि इस बार पुलिस ने उन्हें परेशान नहीं किया है। पुलिस की गाड़ी दो बार आई थी और शांतिपूर्वक प्रदर्शन देखकर लौट गई।