मुक्तसर में आम आदमी क्लीनिकों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें
आम आदमी क्लीनिक संयुक्त फ्रंट के आह्वान पर मुक्तसर जिले के सभी 26 आम आदमी क्लीनिक बंद रहे, जिससे रोजाना 2,000 से अधिक मरीजों की ओपीडी प्रभावित हुई। ...और पढ़ें

आम आदमी क्लीनिकों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप। फाइल फोटो
HighLights
मुक्तसर में 26 आम आदमी क्लीनिकों में कामकाज बंद रहा।
हड़ताल से 2,000 से अधिक मरीजों की ओपीडी प्रभावित हुई।
सिविल अस्पताल मुक्तसर में ओपीडी में भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
राजिंदर पाहड़ा, श्री मुक्तसर साहिब। आम आदमी क्लीनिक संयुक्त फ्रंट के आह्वान पर सोमवार को जिला मुक्तसर के सभी 26 आम आदमी क्लीनिकों में कामकाज पूरी तरह बंद रहा। डाक्टर, फार्मासिस्ट और क्लीनिक असिस्टेंट्स ने मांगों को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय में धरना दिया, जिसका सीधा असर शहरी और ग्रामीण मरीजों पर पड़ा।
सेहत विभाग के आंकड़ों के अनुसार आम आदमी क्लीनिकों में रोजाना 2,000 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी रहती है,जो दवा और जांच के लिए आते हैं। हड़ताल के कारण यह सभी सेवाएं ठप रहीं। मजबूरन मरीजों को दवा और चेकअप के लिए सिविल अस्पताल और नजदीकी के सीएचसी का रुख करना पड़ा।
ज्यादातर क्लीनिक मरीजों के घर के पास हैं और यहां दवा नहीं मिलने से तीन से चार किलोमीटर या उससे भी ज्यादा दूर स्थित सरकारी अस्पतालों में जाना पड़ा। दूरी बढ़ने से बुजुर्ग और रोजाना दवा लेने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।
सिविल अस्पताल की ओपीडी अधिक रही
हड़ताल का असर जिला मुख्यालय के सिविल अस्पताल में सबसे ज्यादा दिखा, यहां सोमवार को ओपीडी में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई। आम दिनों में यहां की ओपीडी 450-500 के बीच रहती है। लेकिन आज 700 के पार कर गई। इलाज व चेकअप करवाने वालों की भारी भीड़ देखी गई।
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अधिकांश मरीज खांसी,जुकाम, बुखार,शुगर, बीपी व अन्य बीमारियों के थे। यही हाल मलोट और गिद्दड़बाहा का भी रहा। सिविल अस्पताल मुक्तसर के एसएमओ डा. राजीव सचदेवा ने कहा कि वैसे सोमवार को ओपीडी अधिक रहती है। ऊपर से आम आदमी क्लीनिकों की हड़ताल से सिविल अस्पताल में ओपीडी और बढ़ी है। सभी को इलाज व दवा मिली है। अस्पताल में कोई परेशानी नहीं हुई।
मरीजों को हुई परेशानी
भुल्लर कालोनी की वीरपाल कौर ने बताया कि वह सुबह शुगर जांच और दवा लेने क्लीनिक पहुंची थीं। यहां आकर पता चला कि हड़ताल है। अब सिविल अस्पताल जाना पड़ रहा है। शुगर की दवा में गैप नहीं कर सकते, इसलिए जाना मजबूरी है।
कुलविंदर कौर ने बताया कि वह भुल्लर कालोनी स्थित आम आदमी क्लीनिक पर बीपी चेक करवाने व दवा लेने आई थी। लेकिन यहां कर्मचारियों की हड़ताल है। जिस कारण उसे इलाज नहीं मिला।
बुजुर्ग लखवीर सिंह ने बताया कि वह आम आदमी क्लीनिक पर दवा लेने आया था। उसने अपना बीपी भी चेक करवाना था। मगर यहां क्लीनिक बंद पड़ा है। कर्मचारियों की हड़ताल बताई गई है। अब वह सरकारी अस्पताल में जाकर चेक करवाएगा।
कर्मचारियों की यह हैं प्रमुख मांगें
- -वर्तमान में लागू इम्प्लेमेंट प्रणाली को खत्म कर सेहत विभाग के अधीन कर्मियों की नियुक्ति की जाए।
- -यदि इम्प्लेमेंट से हटाया जाता है तो सीधे डीएचएस के अधीन नियुक्ति पत्र देकर मरीज इंसेटिव तय हो।
- - मेडिकल अफसर: 80 रुपये प्रति मरीज
- - फार्मासिस्ट: 30 मरीज
- - असिस्टेंट: 25 मरीज दर्ज
- - क्लीनिक सहायकों की न्यूनतम योग्यता एएनएम है, इसलिए उन्हें आधिकारिक रूप से एएनएम का दर्जा और वेतन दिया जाए।
- - सरकारी भर्तियों में आम आदमी क्लीनिक कर्मियों को उनके कार्यकाल के अनुभव के अंक दिए जाएं और अधिकतम आयु सीमा में विशेष छूट दी जाए।
- - कर्मियों को साल में 15 कैजुअल लीव और मेडिकल लीव की सुविधा दी जाए