नवांशहर में कुत्तों का 'खूनी' आतंक, सिर्फ जनवरी में 676 लोगों को बनाया शिकार; दहशत में जिले के नागरिक
नवांशहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, जनवरी में 676 लोगों को काटा गया। प्रतिदिन औसतन 20 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं, जिससे नागरिकों में भय ह ...और पढ़ें

सिर्फ जनवरी में 676 लोगों को कुत्तों ने काटा (फइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
महेंद्र घणघस, नवांशहर। आवारा कुत्तों द्वारा लोगों को काटने के हर दिन औसतन 20 से अधिक मामले जिले में सामने आ रहे हैं। लोगों को आवारा आतंक से राहत दिलाने के लिए कोर्टों की सख्त टिप्पणियों से लेकर सरकारों द्वारा अधिकारियों को पुख्ता प्रबंध करने के आदेश दिए जा रहे हैं। परंतु अभी तक प्रबंधों की जमीन तैयार होती नहीं दिख रही। इस लिए लोगों को इन आवारा आतंक से बचाव के लिए स्वयं ही सावधानी रखनी होगी।
बात अगर जनवरी माह की करें तो जिले में 676 लोगों को कुत्तों ने काटा है। इसी प्रकार 45 लोग अन्य जानवरों द्वारा काटे जाने के शिकार हुए हैं। फरवरी माह के आंकड़े माह समाप्त होने के बाद सामने आएंगे। इसी प्रकार वर्ष 2025 में जिले में कुल 6946 लोगों को कुत्तों ने काटा था जबकि 427 लोगों को अन्य जानवरों ने भी काटा था। हर वर्ष हजारों लोगों को कुत्तों के काटने की घटनाओं ने लोगों में खौफ पैदा कर दिया है।
रैबीज वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में नेशनल रैबीज कंट्रोल प्रोग्राम के जिला नोडल अधिकारी डा. राकेश पाल ने बताया कि 31 जनवरी तक हमारे पास कुल 1840 रैबीज वैक्सीन उपलब्ध थी जिसमें 1492 एआरवी व 348 एआरएस शामिल हैं।
उन्होंने बताया फरवरी माह की उपलब्धता के बारे में माह समाप्त होने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी क्योंकि इस माह में कुत्तों के काटे जाने पर कितने लोगों को वैक्सीन लगाई गई है इसकी रिपोर्ट माह की समाप्ति पर तैयार होगी। वैक्सीन रूटिन में हर माह आती है।
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उन्होंने बताया कि कुत्तों के काटने को लेकर कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं जैसे कि कुत्ते को परेशान न करें न ही डराएं, जब कुत्ता गुस्से में हो तो उससे दूर रहें और हिलें नहीं, शांति बनाकर कुत्ते को जल्दी पकड़ना चाहिए व कुत्ते के काटने पर जख्म को पानी व साबुन से तुरंत धो लेना चाहिए और जल्द नजदीकी सेहत केंद्र में जाकर प्रथम उपचार करवाना चाहिए।
ड. राकेश पाल ने बताया कि सभी को अपने पालतु कुत्तों की समय-समय पर वैक्सीनेशन करवानी चाहिए। उन्होंने बताया कि रैबीज जानलेवा हो सकती है पर इसका बचाव पूरी तरह से संभव है।
धार्मिक उत्सव कमेटी के प्रधान जुगल किशोर दत्ता कहते हैं कि शहर में आवारा कुत्तों का आतंक प्रमुख समस्या बन गया है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। रेबीज के डर और बढ़ते हमलों विशेषकर गली मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड के कारण लोगों का जीवन नरक बन गया है और वे घरों में कैद होने को मजबूर हैं। जल्द ही इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रयास सोसायटी के सीनियर कार्यकर्ता दिनेश जैन ने कहा प्रशासन कुत्तों की नसबंदी करें कुत्तों को किसी जंगल में छोड़ दें लेकिन उनकी जिंदगी खत्म नहीं होनी चहिए। हर दिन लोगों को कुत्तों के काटने की घटनाओं से शासन व प्रशासन कोई सबक नहीं ले रहा, लोगों को आवारा आतंक से कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही।
जिला व्यापार मंडल प्रधान चिंटू अरोड़ा ने कहा कि आवारा कुत्तों से लोगों को सुरक्षित माहौल दिलाने के लिए सरकार को जल्द कदम उठाने चाहिएं। खासकर बच्चों पर आवारा कुत्ते अधिक आक्रमण कर रहे हैं। हमारी संस्था की ओर से पक्षियों के लिए एक बड़े टावर में रहने के लिए बनाया गया है। आवारा कुत्तों के लिए हमारी संस्था सोचती है कि इसकी जिंदगी भी बच सकें इसके लिए क्या किया जाए ?