पंजाब के नवांशहर में मौत बनकर दौड़ रहे जुगाड़ू वाहन, खानापूर्ति तक सिमटी प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ की भूमिका
नवांशहर में बिना पंजीकरण और सुरक्षा मानकों के दौड़ रहे जुगाड़ू वाहन लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। प्रशासन की ढिलाई के कारण ये वाहन बेधड़क च ...और पढ़ें

नवांशहर में मौत बनकर दौड़ रहे जुगाड़ू वाहन। फोटो जागरण
HighLights
जुगाड़ू वाहन बिना पंजीकरण और सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं।
ये वाहन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, कोई मुआवजा नहीं।
प्रशासन की ढिलाई पर लोग निर्माताओं पर कार्रवाई चाहते हैं।
मुकन्द हरी जुल्का, नवांशहर। शहर और आसपास के इलाकों में बिना पंजीकरण और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर दौड़ रहे जुगाड़ू वाहन लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। प्रतिबंध के बावजूद ये अवैध मालवाहक वाहन बेधड़क सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन इन पर लगाम कसने वाला कोई नहीं है।
प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ की भूमिका इस गंभीर मामले में महज खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई है। इन जुगाड़ू वाहनों की सबसे बड़ी खामी यह है कि इनका कोई आधिकारिक रिकार्ड या डेटा मोटर वाहन विभाग के पास नहीं है। इन वाहनों का न तो कोई रजिस्ट्रेशन होता है, न फिटनेस सर्टिफिकेट और न ही बीमा। इसके चलते अगर कोई दुर्घटना हो जाए, तो पीड़ित पक्ष को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं मिल पाता है।
तेज रफ्तार और तेज आवाज के साथ दौड़ने वाले ये वाहन अक्सर हादसों का कारण बनते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। रोजी-रोटी के नाम पर इन वाहनों के जरिए सरिया, रेत, ईंटें, बजरी और मार्बल जैसी भारी निर्माण सामग्री ढोई जा रही है।
मुनाफे के चक्कर में इन पर लोहे के पाइप और सरिया इतने बाहर तक निकालकर लादा जाता है कि पीछे या साइड से आने वाले वाहन चालकों के लिए यह जानलेवा साबित होते हैं। इसके अलावा, संकरे बाजारों में मनमर्जी से वाहन खड़े कर देने के कारण शहर में अक्सर भारी जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।
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हैरानी की बात यह है कि केवल लेबर क्लास ही नहीं, बल्कि शहर के कई बड़े कारोबारी और बिल्डर भी अपना सामान मंगवाने के लिए इन्हीं जुगाड़ वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर में ऐसे कई ठिकाने हैं जहां पुराने और नए मोटरसाइकिलों को काटकर उनके पीछे लोहे की बाडी वेल्ड कर दी जाती है।
बाद में इन जुगाड़ू वाहनों को चालकों को प्रतिदिन किराए पर दे दिया जाता है। कुछ जुगाड़ू वाहनों का इस्तेमाल तो यात्रियों को ढोने के लिए भी किया जा रहा है।
शहरवासियों की मांग: बनाने वालों पर हो सख्त कार्रवाई
नवांशहर के स्थानीय निवासियों में इस व्यवस्था को लेकर भारी रोष है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन केवल चालकों पर कार्रवाई करने का दिखावा करता है, जबकि असली कसूरवार वे लोग हैं जो पुराने स्कूटर और मोटरसाइकिल को जोड़कर यह अवैध वाहन तैयार कर रहे हैं। इन निर्माणकर्ताओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या कहती है ट्रैफिक पुलिस
इस पूरे मामले पर ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज सुभाष चन्द्र का कहना है कि सरकार ने जुगाड़ू वाहनों पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा रखी है। इन वाहनों को तैयार करना और सड़कों पर चलाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस द्वारा समय-समय पर चेकिंग की जाती है और पकड़े जाने पर ऐसे वाहन चालकों के चालान भी काटे जाते हैं।