पंजाब के नवांशहर में होली की धूम, स्वदेशी और हर्बल रंगों से सजे बाजार
नवांशहर के बाजार होली के लिए सज गए हैं, जहाँ स्वदेशी और हर्बल रंगों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। लोग रासायनिक रंगों से परहेज कर पर्याव ...और पढ़ें
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होली को लेकर सज गए बाजार, इस बार स्वदेशी व हर्बल रंगों की बढ़ी मांग।
HighLights
नवांशहर के बाजार होली के लिए पूरी तरह तैयार
स्वदेशी और हर्बल रंगों की मांग में भारी वृद्धि
त्वचा विशेषज्ञ ने सुरक्षित होली मनाने की सलाह दी
ऋषि चंद्र, नवांशहर। रंगों के पर्व होली को लेकर शहर के बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। मुख्य बाजार, पुरानी दाना मंडी, रेलवे रोड और आर्य समाज रोड सहित विभिन्न इलाकों में रंग, गुलाल, पिचकारी, अबीर और होली से जुड़ी सजावटी वस्तुओं की दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है, बाजारों में खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी है। इस बार खास बात यह है कि स्वदेशी और हर्बल रंगों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से लोग केमिकल युक्त रंगों से परहेज कर रहे हैं और त्वचा व पर्यावरण के अनुकूल हर्बल रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में हल्दी, चंदन, फूलों के अर्क और प्राकृतिक सामग्री से बने गुलाल की भरमार है। इन रंगों को विशेष पैकिंग में उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से होली मना सकें। बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को ध्यान में रखते हुए परिवार स्वदेशी रंगों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं।
आर्य समाज रोड के एक व्यापारी ने बताया कि इस बार चीन निर्मित पिचकारियों और रंगों की जगह देश में बने उत्पादों की बिक्री अधिक हो रही है। स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार की गई लकड़ी और स्टील की पिचकारियां भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग उत्साह से खरीद रहे हैं। इसके अलावा हनुमान जी के गुर्ज, कार्टून और फिल्मी किरदारों वाली पिचकारियां बच्चों को खूब आकर्षित कर रही हैं।
बाजार में रंगों के साथ-साथ होली पर बनने वाले पकवानों की सामग्री की भी खूब बिक्री हो रही है। सूखे मेवे, खोया, नारियल, मैदा और मसालों की दुकानों पर भी रौनक देखने को मिल रही है। मिठाई की दुकानों पर गुजिया, मठरी और नमकीन की अग्रिम बुकिंग शुरू हो चुकी है। कई दुकानदार ग्राहकों को विशेष छूट और आकर्षक ऑफर भी दे रहे हैं, जिससे खरीदारी का उत्साह और बढ़ गया है।
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नगर परिषद और प्रशासन की ओर से भी साफ-सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। बाजारों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। व्यापारियों ने भी प्रशासन का सहयोग करते हुए प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े और कागज के थैले उपलब्ध कराने की पहल की है।
महिलाओं और युवाओं में इस बार ऑर्गेनिक रंगों के साथ-साथ सफेद कुर्ते, टी-शर्ट और होली स्पेशल परिधानों की मांग बढ़ी है। सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते रंग-बिरंगी टोपी, चश्मे और होली स्लोगन वाली टी-शर्ट भी ट्रेंड में हैं। फोटोग्राफी और सेल्फी के लिए खास बैकड्रॉप और प्रॉप्स की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा रही है।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस बार होली का कारोबार पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रहने की उम्मीद है। स्वदेशी उत्पादों को मिल रहे समर्थन से स्थानीय व्यापारियों और छोटे उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी। रंगों के इस पावन पर्व को लेकर बाजारों में उत्साह और उमंग साफ झलक रही है। लोग सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और स्वदेशी उत्पादों के साथ होली मनाने की तैयारी में जुटे हैं, जिससे त्योहार की खुशियां दोगुनी हो गई हैं।
रासायनिक रंग पहुंचा सकते हैं त्वचा को नुकसान: त्वचा विशेषज्ञ
त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. गुरजीत कौर का कहना है कि होली रंगों का त्योहार है, लेकिन इसे सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से मनाना जरूरी है। केवल हर्बल या प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें, क्योंकि रासायनिक रंग त्वचा, आंखों और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
रंग खेलने से पहले शरीर पर सरसों या नारियल का तेल लगा लें, ताकि रंग आसानी से उतर जाए। आंखों में रंग जाने पर तुरंत साफ पानी से धोएं और जलन बनी रहे तो चिकित्सक से संपर्क करें। अधिक मिठाइयों और तले खाद्य पदार्थों से परहेज करें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें तथा पर्याप्त पानी पीते रहें।